दोहा
विषय-उजास
मानव हृदय उजास हो,होते सुंदर काम।
नेक कर्म औ भाव से,मिलता जग में नाम।।
बुरे कृत्य को छोड़ कर,लाएँ सुंदर भाव।
मानवता की राह हो,कभी न हो ठहराव।।
पुलकित मन सबका करें,भरदे नव उल्लास।
भारत का हर नागरिग,रखें बीच विश्वास।।
नित्य उजाला ज्ञान का,जन-जन में संचार।
मृदु वाणी सुंदर रहे,सुंदर हो व्यवहार।।
द्वेष बड़ा घातक बना,करता सदा विनाश।
मानव की पीड़ा सुने,कभी न करे निराश।।
भाव सर्मपण का धरें,कलुषित होय न कर्म।
मानव हृदय उजास हो,एक रहे सब धर्म।।
सभी मिटादे रंज अब,हो चहुँओर प्रकाश।
भारत के उत्थान में,आलस का हो नाश।।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़