गीत लेखन
विषय -उजास मन
प्रेम सरित उद्गम करने को,
अनुरागी मन चाहिए।
घृणा भाव को तजना होगा,
उजास मन अब चाहिए।
1-दंभ कपट से भरे कृत्य को,
मन से दूर भगाइए।
मानवता के पथ पर चलकर,
समता को अपनाइए।
दुख पीड़ा घेरे है जिनको,
उनको राह दिखाइए।
प्रेम सरित उद्गम करने को,
उजास मन अब चाहिए।
2-नारी का सम्मान बड़ा है,
विश्व जगत की सार है।
छली जा रही आज ये देखो,
मान एक आधार है।
बहन समझकर रक्षा करदे,
भाई ऐसा चाहिए।
प्रेम सरित उद्गम करने को,
उजास मन अब चाहिए।
3-छलते है जो गरीब जन को
उनको न्याय दिलाइए।
अधर पर रखते कटु वचन जो,
मीठा भाव पिलाइए।
नेक राह पर जो बढ़ जाए,
उजास मानुष चाहिए।
प्रेम सरित उद्गम करने को
उजास मन अब चाहिए।
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