जिस दिन अंत:तमस मिटेगा,
समझो सच्ची दीवाली।
मानवता का भाव जगेगा,
हृदय नही होगा खाली।
दीन दुखी की सेवा करदे,
समझो मन है वो सच्चा।
लोभ मोह में फँसा रहें जो,
उसका मन समझो कच्चा।
जिसपर मानुष हँसकर बैठै,
प्रेम भाव की हो डाली।
जिस दिन अंतः तमस मिटेगा,
समझो सच्ची दीवाली।
फुलझड़ियाँ सा रौशन करदें,
समता जग में फैलायें।
मीठे सब पकवान की तरह
मीठे बोल से मुस्कायें।
भेदभाव का बंधन टूटे।
द्वेष हृदय से हो खाली।
जिस दिन अंतः तमस मिटेगा
समझो सच्ची दीवाली।
हृदय झूठ को आने ना दें,
सुंदर मन के हो माली।
नष्ट कपट जैसै ही होगा,
फैलें मन की हरियाली।
कष्ट मिटाकर खुशियाँ बाँटे,
मनुज वही भाग्यशाली।
जिस दिन अंतः तमस मिटेगा,
समझो सच्ची दीवाली।
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