Sunday, 27 October 2019

दोहा-उजास मन

दोहा
विषय-उजास

मानव हृदय उजास हो,होते सुंदर काम।
नेक कर्म औ भाव से,मिलता जग में नाम।।

बुरे कृत्य को छोड़ कर,लाएँ सुंदर भाव।
मानवता की राह हो,कभी न हो ठहराव।।

पुलकित मन सबका करें,भरदे नव उल्लास।
भारत का हर नागरिग,रखें बीच विश्वास।।

नित्य उजाला ज्ञान का,जन-जन में संचार।
मृदु वाणी सुंदर रहे,सुंदर हो व्यवहार।।

द्वेष बड़ा घातक बना,करता सदा विनाश।
मानव की पीड़ा सुने,कभी न करे निराश।।

भाव सर्मपण का धरें,कलुषित होय न कर्म।
मानव हृदय उजास हो,एक रहे सब धर्म।।

सभी मिटादे रंज अब,हो चहुँओर प्रकाश।
भारत के उत्थान में,आलस का हो नाश।।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

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