पावस में मन मेरा कहता,
पाऊँ तेरा प्यार।
तरस रहें हैं नयना मेरे,
देखो यह श्रृंगार।
(1)
पावस मेरा हृदय जलाती,
आओ प्रियवर साथ।
हृदय भाव को समझो मेरा,
दो हाथों में हाथ।
तन मन व्याकुल तड़प रहा है,
होवे कब दीदार।
पावस में मन मेरा कहता,
पाऊँ तेरा प्यार।
(2)
नीर नयन झर-झर बहते है,
हृदय मिलन की आग।
प्रेम प्रफुल्लित मचल रहा है,
सुनलो मधुरिम राग।
सुंदर पावन प्रेम हमारा,
आकर दो उपहार।
पावस में मन मेरा कहता,
पाऊँ तेरा प्यार।
(3)
प्रेम तपिस नित बढ़ती जाती,
हरपल जपती नाम।
मैं राधा रानी हूँ तेरी,
तू ही मेरा श्याम।
पुलकित नयना व्याकुल है अब,
करने को सत्कार।
पावस में मन मेरा कहता,
पाऊँ तेरा प्यार।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
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