गीत-तीन रंग मेँ बँधकर आया
तीन रंग में बँधकर आया,
राखी का त्योहार है।
स्वतंत्रता का दिवस आज है,
दोनों का सत्कार है।
(1)
मर मिटने का प्रण है करते,
वीरों का बलिदान है।
कर्म पथ की राह है चुनते,
ये अपना अभिमान है।
चैन से घरों पर सोते है,
ये हमपर उपकार है।
तीन रंग में बँधकर आया,
राखी का त्योहार है।
(2)
देश भाव रक्षाबंधन में,
राखी रखलें संग में।
केशरिया औ श्वेत हरा हो,
चुनलो तीनो रंग में।
पहनाओ सब हृदय भाव से,
वीरों का सत्कार है।
तीन रंग में बँधकर आया,
राखी का त्योहार है।
(3)
आओ प्रण अपना हम करलें,
भाईचारा प्यार दें।
हिंदू मुस्लिम भेद भुलाके,
सबको सम सत्कार दें।
जात-पात का भेद मिटाओ,
ये समता आधार है।
तीन रंग में बँधकर आया
राखी का त्योहार है।
रचनाकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़
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