दोहावली - घट रहा है मेल मिलाप
वर्तमान की जिंदगी, हुई आज अति व्यस्त ।
मोबाइल चहुँओर है, मनुज लीन अरु मस्त ।।
आज दूरियाँ बढ़ रही, फैला जो यह यंत्र।
मेल मिलाप कम हुए, टूटे बंधन तंत्र।।
कुछ जन लेते लाभ है, करते इसपर कार्य।
कुछ आनंद में लीन है, दिनभर रखते धार्य।।
युवा हमारे देश के, तनिक न रखते भान।
शिक्षा के शुभ ध्येय का, नहीं रखें संज्ञान।।
नहीं ज्ञान को धारते, नेट चेट में लीन।
फोटो फिल्टर में लगे, श्वेत श्याम रंगीन।।
नहीं जीविका ढूँढते, मात पिता पर भार।
डेटा पैक रिचार्ज कर, घटा रहे आधार।।
समय बड़ा बलवान है, आज युवा अंजान।
हँसी ठिठोली कर रहे, छूट रहा शुभ ज्ञान।।
आज मेहनत छोड़कर, खेल रहें है खेल।
गेम खेल धन चाहिए, व्यर्थ रखें है मेल।।
अंजानों से मेल रख, घर पर करें न बात।
चिंता पालक कर रहे, व्यस्त रहें दिन रात।।
घटता वार्तालाप है, मोबाइल का दौर।
मेल मिलाप घट रहा, कोई करे न गौर।।
संबंधों के बंध अब, घटते है अब नित्य।
अनाचार घटना बढ़ी, निसदिन जघन्य कृत्य।।
रोगग्रस्त जो हो रहे, कारण यह भी एक।
मोबाइल निज कम चले, वाणी यह है नेक।।
हे जन आज विचारिए, बदलें अपनी चाल।
शुभ दिन नित्य सुधारिए, खुद ही करें कमाल।।
No comments:
Post a Comment