गीतिका - लोकतंत्र का सार लिखें
लोकतंत्र का पर्व है आया जनहित पथ उत्थान लिखें।
कविवर देशहितों को लिख दें क्या है इसका मान लिखें।
रोजगार की मारामारी युवा भटकते नित आज है,
पढ़ लिखकर भी नहीं नौकरी ये नित्य परेशान लिखें।
बड़ी किसानों की पीड़ा है उनकी पीड़ा सार कहे,
कष्ट भरें उनके जीवन का नेता लें यह भान लिखें ।
अनाचार का क्रम जो फैला राजनीति के खेल में,
लुटती बाला की पीड़ा का चीख चीख सम्मान लिखें।
पेट अगन जो सता रही है पालक बच्चे संग भिड़े,
बाल आज मजदूरी करते देख क्यों अंजान लिखें।
भ्रष्टाचार व्याप्त है इतना कैसे रोकें खेल बुरा,
भ्रष्टाचारी लूट रहे जो जन जन को सत भान लिखें।
लूटपाट है वर्तमान में रिश्तों का अब मोल नहीं,
भाई भाई का दुश्मन है अपनापन है शान लिखें।
मानवता को भूल रहें है खून खराबा फैल रहा,
मुक्ति मिले इन सबसे कविवर वोट महत्ता दान लिखें।
लोकतंत्र का ध्येय न भूलें जीवन जो उद्धार करे,
देशवासियों के हित पथ में संविधान शुभ ज्ञान लिखें।
व्याप्त मंहगाई से जन आहत भारत का यह हाल यहाँ,
दीनों के जीवन यापन का दुख का कुछ तो गान लिखें।
लोकतंत्र में सत्ता भाए नेता चलते लोभ धरे,
सच्चे पथ पर नेता होवे जनता है भगवान लिखें।
No comments:
Post a Comment