Wednesday, 12 May 2021

सरसी छंद/हिंदी भाषा

सरसी छंद-हिंदी  है अभिमान देश का


हिंदी है अभिमान देश का, विश्व करे सम्मान ।

हिंदी लेखन मान बढ़ाता, हृदय भाव की शान ।।


हिंदी है आवाज हृदय की,सृजन भाव आधार।

हिंदी लेखन श्रेष्ठ जगत में, करे सदा उद्धार।।


हिंदी भाषा यही सिखाती, रखें प्रेम का भाव ।

बाँटें शिक्षा हिंदी में हम, कभी न हो अलगाव ।।


हिंदी से हम ज्ञानी बनते, करते नित्य विकास ।

नेक भाव से हिंदी सीखें, भरे हृदय उल्लास ।।


हिंदी का सम्मान करें सब, करें नित्य संचार ।

हिंदी भाषा मेल बढ़ाये, इससे ही उद्धार ।।


हिंदी में नित काव्य गढ़े हम, एक रहे आगाज ।

जन-जन तक हिंदी पहुँचाये, दें जनहित का साज ।।


हिंदी भाषा हृदय बसाकर, नित्य बढ़ायें प्रेम ।

जनहित से उद्धार नित्य हो, सदा रहे सब क्षेम ।।


रचनाकार - आशा आजाद कृति


Monday, 10 May 2021

गीत-कभी अशुभ बोलें नही

गीत-कभी अशुभ बोलें नही


कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।

अपना हृदय पवित्र हो, यह ही सच्चा ज्ञान ।।


स्वयं आप में झाँकियें, कैसा है व्यवहार ।

धर्म कर्म की राह पर, किया कभी उद्धार ।

स्वयं प्रशंसा आप कर, रखते झूठा शान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।


बोले मानव झूठ तब, सदा दिखाएँ राह ।

देख सफलता अन्य की, कभी न होवें डाह ।

सबसे बढ़कर बोल है, इसका ही है मान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।।


जैसी भाषा चाहते, बोलें वैसै बोल ।

इस जीवन में जान लें, शब्द शब्द अनमोल ।

निर्मलता के भाव से, सबको दें सम्मान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।


ईश्वर ने गढ़ कर हमें, डालें समान भाव ।

कड़वी भाषा बोलकर, रखते स्वयं तनाव । 

मानुष अब भी वक्त है, रख भाषा का भान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।


रचनाकार-आशा आजाद

कोरबा छतीसगढ़

मुक्तक-माँ

गीत - दाई ले संसार


ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।

मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।।


सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम ।

भाव धरय नित सेवा के ओ दाई चारो धाम ।

पालन पोषण नित करय जी ओखर ले उद्धार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


जीव धरय नौ माह कोख मा मिले जन्म ले नाम ।

दूध धार ले तृप्त करय ओ सत सत हवे प्रणाम ।

जिम्मेदारी सदा निभावय दय सुघ्घर व्यवहार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


घर ममहाथे जइसे तुलसी घर के चारो ओर ।

मया बरोबर दाई बाँटथे नाता रखे बटोर ।

अपन ज्ञान ले करथे दाई घर ला नित अंजोर ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


कलयुग मा बस एक दाई हे बाँटय मया समान ।

करुणा के मूरत कहलावै राखय सुघ्घर ज्ञान ।

करम धरम ले मुख नइ मोड़िस कतको होवय भार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।




गीत-माँ

गीत - दाई ले संसार


ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।

मया बाँटथे निर्मल मन ले एखर ले संसार ।।


सुघ्घर घर ला राखय दाई सुघ्घर जम्मो काम ।

भाव धरय नित सेवा के ओ दाई चारो धाम ।

पालन पोषण नित करय जी ओखर ले उद्धार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


जीव धरय नौ माह कोख मा मिले जन्म ले नाम ।

दूध धार ले तृप्त करय ओ सत सत हवे प्रणाम ।

जिम्मेदारी सदा निभावय दय सुघ्घर व्यवहार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


घर ममहाथे जइसे तुलसी घर के चारो ओर ।

मया बरोबर दाई बाँटथे नाता रखे बटोर ।

अपन ज्ञान ले करथे दाई घर ला नित अंजोर ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।


कलयुग मा बस एक दाई हे बाँटय मया समान ।

करुणा के मूरत कहलावै राखय सुघ्घर ज्ञान ।

करम धरम ले मुख नइ मोड़िस कतको होवय भार ।

ईश्वर के अवतार दाई हे जिनगी के आधार ।।




Thursday, 6 May 2021

दोहावली-मृत्यु

दोहावली-अटल सत्य है मृत्यु


अटल सत्य तो मृत्यु है, जिसपर चले न जोर ।

काल छीन ले कब कहाँ, साँसों की यह डोर।।


क्षण भर की है जिंन्दगी, करें पुण्य सब कर्म ।

मृदुवाणी अरु प्रेम से, सदा निभाएँ धर्म ।।


मिट्ठी में मिल जाएगा, तन अपना यह जान ।

जीवन यह स्मरणीय हो, करले काम महान ।।


नेकी की जो राह है, देती है सम्मान ।

दीन दुखी का साथ दे, ज्ञान करें अभिदान ।।


श्रेष्ठ रूप का दंभ भर, करते बहुत गुमान ।

अंत समय जाना पड़ा, सबको है शमशान ।।


काला गोरा भ्रम करें, नेक कर्म अनमोल ।

मृदुवाणी जो बोलते, दे अंतर रस घोल ।।


रंग भेद को त्यागकर, गढ़े श्रेष्ठ प्रतिमान ।

मानवता को थामकर, बनें हृदय की शान ।।


गोरा तन कुछ का रहे, कुछ मन काला होय ।

चतुराई से छल करें, पृष्ठ घात पर रोय ।।


कुटिल भावना जो रखे, सत्य न करते भान ।

बुरे कर्म अंजाम में, मृत्यु रही बलवान ।।


समझो हँसकर मृत्यु जब, हमें बुलाए पास ।

कर्म नेक हमने किया, करलें यह विश्वास ।।