दोहावली-अटल सत्य है मृत्यु
अटल सत्य तो मृत्यु है, जिसपर चले न जोर ।
काल छीन ले कब कहाँ, साँसों की यह डोर।।
क्षण भर की है जिंन्दगी, करें पुण्य सब कर्म ।
मृदुवाणी अरु प्रेम से, सदा निभाएँ धर्म ।।
मिट्ठी में मिल जाएगा, तन अपना यह जान ।
जीवन यह स्मरणीय हो, करले काम महान ।।
नेकी की जो राह है, देती है सम्मान ।
दीन दुखी का साथ दे, ज्ञान करें अभिदान ।।
श्रेष्ठ रूप का दंभ भर, करते बहुत गुमान ।
अंत समय जाना पड़ा, सबको है शमशान ।।
काला गोरा भ्रम करें, नेक कर्म अनमोल ।
मृदुवाणी जो बोलते, दे अंतर रस घोल ।।
रंग भेद को त्यागकर, गढ़े श्रेष्ठ प्रतिमान ।
मानवता को थामकर, बनें हृदय की शान ।।
गोरा तन कुछ का रहे, कुछ मन काला होय ।
चतुराई से छल करें, पृष्ठ घात पर रोय ।।
कुटिल भावना जो रखे, सत्य न करते भान ।
बुरे कर्म अंजाम में, मृत्यु रही बलवान ।।
समझो हँसकर मृत्यु जब, हमें बुलाए पास ।
कर्म नेक हमने किया, करलें यह विश्वास ।।
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