Thursday, 6 May 2021

दोहावली-मृत्यु

दोहावली-अटल सत्य है मृत्यु


अटल सत्य तो मृत्यु है, जिसपर चले न जोर ।

काल छीन ले कब कहाँ, साँसों की यह डोर।।


क्षण भर की है जिंन्दगी, करें पुण्य सब कर्म ।

मृदुवाणी अरु प्रेम से, सदा निभाएँ धर्म ।।


मिट्ठी में मिल जाएगा, तन अपना यह जान ।

जीवन यह स्मरणीय हो, करले काम महान ।।


नेकी की जो राह है, देती है सम्मान ।

दीन दुखी का साथ दे, ज्ञान करें अभिदान ।।


श्रेष्ठ रूप का दंभ भर, करते बहुत गुमान ।

अंत समय जाना पड़ा, सबको है शमशान ।।


काला गोरा भ्रम करें, नेक कर्म अनमोल ।

मृदुवाणी जो बोलते, दे अंतर रस घोल ।।


रंग भेद को त्यागकर, गढ़े श्रेष्ठ प्रतिमान ।

मानवता को थामकर, बनें हृदय की शान ।।


गोरा तन कुछ का रहे, कुछ मन काला होय ।

चतुराई से छल करें, पृष्ठ घात पर रोय ।।


कुटिल भावना जो रखे, सत्य न करते भान ।

बुरे कर्म अंजाम में, मृत्यु रही बलवान ।।


समझो हँसकर मृत्यु जब, हमें बुलाए पास ।

कर्म नेक हमने किया, करलें यह विश्वास ।।




No comments:

Post a Comment