Monday, 10 May 2021

गीत-कभी अशुभ बोलें नही

गीत-कभी अशुभ बोलें नही


कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।

अपना हृदय पवित्र हो, यह ही सच्चा ज्ञान ।।


स्वयं आप में झाँकियें, कैसा है व्यवहार ।

धर्म कर्म की राह पर, किया कभी उद्धार ।

स्वयं प्रशंसा आप कर, रखते झूठा शान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।


बोले मानव झूठ तब, सदा दिखाएँ राह ।

देख सफलता अन्य की, कभी न होवें डाह ।

सबसे बढ़कर बोल है, इसका ही है मान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।।


जैसी भाषा चाहते, बोलें वैसै बोल ।

इस जीवन में जान लें, शब्द शब्द अनमोल ।

निर्मलता के भाव से, सबको दें सम्मान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।


ईश्वर ने गढ़ कर हमें, डालें समान भाव ।

कड़वी भाषा बोलकर, रखते स्वयं तनाव । 

मानुष अब भी वक्त है, रख भाषा का भान ।

कभी अशुभ बोलें नहीं, हो जाता आह्वान ।।


रचनाकार-आशा आजाद

कोरबा छतीसगढ़

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