Monday, 3 August 2020

चौपाई छंद,मेरा सुंदर गाँव निराला


मेरा सुंदर गाँव निराला

मेरा सुंदर गाँव निराला।हर्षित मन को करने वाला।
शुद्ध हवा जो निसदिन आये।तन मन को सब शुद्ध बनाये।।

पंक्षी मधुरिम गीत सुनाते।चीं चीं करके हृदय लुभाते।
निर्मल वातावरण लुभाता।सेहत सबके मन को भाता।।

गोबर के कंडे से जानो।धुँआ मारता मच्छर मानो।
घर आँगन है मन को भाता।गोबर से जब है लिप जाता।।

नही प्रदूषण वहाँ सताता।मानुष सुंदर देह बनाता।
सदा मेहनतकश वो होता।बहुत भार वह निसदिन ढोता।।

नही शोरगुल नही लड़ाई।आपस में सब भाई भाई।
विपदा मिलकर दूर भगाते।प्रेम दीप का ज्योत जलाते।।

वहाँ आधार है बस खेती।जो हमको है जीवन देती।
अन्न उगाकर जीवन देते। सब कष्टों को वे लेते।।

बीमारी का नही है रोना।सेहत ही सच्चा है सोना।
वहाँ नही तन सेहत खोता।गाँव शहर से सुंदर होता।।

सुंदर ऐसा गाँव बनाना।जाने पर वह लगे सुहाना।
शुद्ध हवा का आना जाना।इससे सुंदर नही ठिकाना।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

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