सरसी छंद गीत
नेक सृजन का पथ हो माता,भरदो नव विश्वास
जनहित का उद्धार करे हम,सृजन गढ़े अनमोल।
शब्द शब्द में सार समाये,मन जाए नित डोल ।
हृदय भाव की अभिव्यक्ति से,फैले नित्य उजास
करूँ वंदना शारद माँ की,करती हूँ यह आस
लेखन में भाईचारा हो,प्रेम भाव का सार।
लेखन से समता उद्गम हो,कर्म बने आधार
सत्य सरिता उद्गम होकर,करे नवीन विकास
करूँ वंदना शारद माँ की,करती हूँ यह आस
No comments:
Post a Comment