Thursday, 21 May 2020

अमृतध्वनि छंद

आशा की अमृत वाणी

अमृतध्वनि छंद

मानव अपने हृदय में,बसा रखा है लोभ,
रोज दिखावा कर रहा,कभी न करता क्षोभ,
कभी न करता-क्षोभ कर्ज में,डूबा रहता,
करे दिखावा,व्यर्थ काज पर,खर्चा करता,
आशा कहती,लोभ मोह में,बनता दानव,
श्रेष्ठ कर्म को,धारण करता,सच्चा मानव।

चादर छोटी पड़ रही,किया खर्च जो व्यर्थ,
मनुज भूलता जा रहा,जीवन का क्या अर्थ,
जीवन का क्या-अर्थ लोभ से,कुछ नहिं हासिल,
सदा संतोष,हृदय भाव में,होवें सामिल,
आशा कहती,जीवन का सब,करलें आदर,
खर्च करे सब,उतना जितना,होवें चादर।

मन से ईष्या त्याग दें,चुनें कर्म आधार,
क्षण भर की है जिंदगी,बने संतोष सार,
बने संतोष-सार हृदय का,लालच त्यागें,
कर देता है,नष्ट सोच अब,मानुष जागें,
आशा कहती,कर्म सभी को,करे लगन से
सत् पथ थामें,अहम मिटाये,अपने मन से।

सुंदर भाग्य तब बने,मन में हो विश्वास,
नेक कर्म की चाह पर,लक्ष्य मिले है पास,
लक्ष्य मिले है-पास कठिन तप,मानुष करता,
जिज्ञासा रख,ज्ञान ध्यान से,आगे बढ़ता,
आशा कहती,लगन भावना,मन के अंदर,
ज्ञान ध्यान से,आप बनेगा,भाग्य सुंदर।

संकट की यह आपदा,करता है बेहाल,
बना आज ये देश में,कोरोना का काल,
कोरोना का-काल रोग ये,कैसा आया,
जन जन पर ये,कहर वायरस,है बरपाया
आशा कहती,धारण करलें,तन पर कंकट,
अनुशासन का,पालन करके,टालें संकट।।

विपदा की यह है घड़ी,तड़प रहे मजदूर
भारत का हर नागरिक,हृदय भाव से शूर
हृदय भाव से-शूर कषट वे,झेल रहे है,
आर्थिक तंगी,कष्ट सभी जन,आज सहे है,
आशा कहती,काज करे नव,शासन उम्दा,
दीन दुखी का,पीर हरे जो,छाई विपदा।

रखकर करुणा भाव को,हृदय भाव के मध्य
दीन दुखी का साथ दें,हो सबका यह लक्ष्य,
हो सबका यह-लक्ष्य राह हम,सुंदर चुनलें,
पीर सताये,दीन दुखी को,उसको हर लें,
आशा कहती,नेकी करलें,हम सब मिलकर,
जनहित का हम,काज करें मन,सुंंदर रखकर।

रखकर मानवता सभी,नित्य करें आगाज,
प्रेम भाव आधार से,करें देशहित काज,
करें देशहित-काज पुण्य पथ,चुनना हमको,
हम ही सच्चे,भारतवासी,गढ़ना सबको
आशा कहती,लोग प्रेरणा,लेंगे पथ पर,
पहल करें हम,हृदय भाव को,निर्मल रखकर।

ममता निश्छल है बहे,देती जीवन दान,
माँ अनुपम वरदान,इस जगती की शान,
इस जगती की-शान ज्ञान है,हर क्षण देती,
सेवा करती,माँ बदले में ,कुछ न लेती,
आशा कहती,स्नेह बाँटती,रखती समता,
सुख दुख सहती,निर्मल होती,माँ की ममता।

ममता की मूरत कहें,जीवन का आधार,
दया भाव रखती सदा,होता निर्मल प्यार,
होता निर्मल-प्यार जगत है,माँ से चलता,
हर जीवन है,माँ के आँचल,में ही पलता,
आशा कहती,बरसाती है,नित्य मधुरता,
हर मुश्किल से,हमें बचाती,माँ की ममता।

No comments:

Post a Comment