दोहा मुक्तक
महामारी
देख महामारी बड़ा,पकड़ रहा है जोर
कोरोना का रोग ये,फैला है चहुँओर
करे संक्रमित देह को,रहना होगा दूर,
झूठ बोलकर लोग कुछ,व्यर्थ करे है शोर।।
जीवन तो अनमोल है,रखलें थोड़ा ध्यान
सतर्कता हरपल रखें,लेकर पूरा ज्ञान,
फैले सूक्ष्म किटाणु से,स्पर्स करे हो जाय।
घर के बाहर रोक है,सुंदर ये अभियान।।
बिगड़ रहे हालात है,फैले निसदिन रोग,
होते है जो नासमझ,कुछ अज्ञानी लोग,
सबको नेक सलाह दें,रखलें थोड़ा धीर,
जनहित के इस राह पर,सभी करें सहयोग।।
कोरोना तो अभिशाप है,मानुष तन का पीर,
रखे सुरक्षा आप ही,घर पर खींच लकीर,
जन मानुष के कर्म में,देना होगा सीख,
विपदाओं को टालकर,पाये स्वस्थ शरीर।।
अनुशासन के रोक पर,हो जाए गंभीर,
साथ प्रशासन के चलें,होवें नही अधीर,
जनहित का ये काम है,रोग भगेगा दूर,
जनता जागरूक हो,बदले खुद तस्वीर।।
रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
पता -मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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