Monday, 6 April 2020

सरसी छंद गीत

सरसी छंद गीत

चाह अगर सुंदर जीवन का,त्याग दें अहंकार।
अंतर के पट खोल तभी तो,मन होवे उजियार।।

कर्म करे जो मन को भाये,मृदु वाणी रस घोल,
सत्य वचन को हृदय बसाये,कर्म का समझे मोल,
क्षणिक समय में पुण्य काज हो,जन्में ये सुविचार,
चाह अगर सुंदर जीवन का,त्याग दें अहंकार।

मन में कभी न द्वेष समाये,ऐसा करलें कर्म,
दीन दुखी की सेवा करना,बनें हमारा धर्म,
अन्नदान की राह में चलना,बने यही संस्कार,
चाह अगर सुंदर जीवन का,त्याग दें अहंकार।

है अनाथ जो जीवन जीते,उनका हो उद्धार,
पालन पोषण शिक्षित करके,दें सुंदर व्यवहार,
इस धरा पर मानुष ही है,शुभ वर के करतार,
चाह अगर सुंदर जीवन का,त्याग दें अहंकार।

दिव्यांगों को मार्ग दिखाना,उनका देवें साथ,
कदम मिलाकर हिम्मत बाँधे,सदा बढ़ायें हाथ,
सकल जगत में नेकी गूँजे,बनके नव झनकार,
चाह अगर सुंदर जीवन का,त्याग दें अहंकार।

रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
कोरबा छतीसगढ़

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