कुकुभ छंद छंद - श्रीमती आशा आजाद
आज जयंती बाबा का है,एकसाथ मिलकर मानें,
संविधान के निर्माता है,गुण को उनके पहचानें।
चलो मनायें जन्मदिवस को,शुभ दिन देखो आया है।
भीम रंग में डूबे हुए है,दिन ये कितना भाया है।
भेदभाव को सभी मिटाके,संविधान लिख छोड़े है,
सकल जगत में मान देखलो,जात पात सब तोड़े है।
शिक्षा का नव अलख जगाके,किया देश में उजियारा,
देखो छूआछूत भगाके,दूर किया सब अँधियारा।
दीन हीन शोषित मानुष को,सब अधिकार बताएँ है,
दलित जाति का हीरा बेटा,शिक्षा का अलख जगाएँ है।
ज्ञानी सबसे बढ़कर बाबा,पढ़ लिख जाओ सिखलाया,
स्वाभिमान के खातिर लड़ना,हक को अपने बतलाया।
याद रखें बाबा की वाणी,समता रखकर बढ़ जाओ।
राह संघर्ष का बस होवें,कर्म करो मंजिल पाओ।।
बाबा की कुर्बानी ऐसी, सुंदर आज हमारा है।
शिक्षित होकर रौशन करना,फर्ज यही तुम्हारा है।।।
प्रेम भाव समरसता बरसे,शिक्षित बनो सिखाया है।
स्वयं अकेला कठिन राह पर,पथ सुंदर दिखाया है।।
ऊपर लाकर जात पात से,नेक कर्म को सब जानो ।
भेदभाव से मुक्त कराया,गुण को उनके सब मानो।।
रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़
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