तातंक छंद गीत
समझो सच्ची दीवाली।
मानवता का भाव जगेगा,
हृदय नही होगा खाली।
दीन दुखी की सेवा करते ,
समझो मन उनका सच्चा ।
लोभ मोह में फँसा रहे जो,
उसका मन जानो कच्चा।।
प्रति पल मानुष हँसकर बैठै,
प्रेम भाव की हो डाली।
जिस दिन अंतः तमस मिटेगा,
समझो सच्ची दीवाली।
फुलझड़ियाँ सा रौशन करदें ,
समता जग में फैलाये।
मीठे पकवानों सा रसमय ,
मधुर गीत गढ़ के गायें।।
भेदभाव का बंधन टूटे ,
द्वेष हृदय से हो खाली।
जिस दिन अंतः तमस मिटेगा
समझो सच्ची दीवाली।
हृदय झूठ को आने मत दे ,
सत्यसंध बन जाओगे ।
नष्ट कपट की कोठरिया कर ,
उज्ज्वलता को पाओगे ।।
पाप बसा जब मन में अपने ,
मान बढ़ाना है जाली।
जिस दिन अंतः तमस मिटेगा,
समझो सच्ची दीवाली।।
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