Sunday, 19 April 2020

गीत 16-10

शंकर छंद गीत-16-10

असमंजस के बीच भँवर में,है घिरा इंसान।
कलुषित करता मानवता को,बन रहा हैवान।

लोभ मोह की लालच रखकर,भूलता सब कर्म।
बना रहा वर्चस्व झूठ पर,त्यागता सब धर्म।
भाई का दुश्मन भाई है,व्यर्थ करता सान।
असमंजस के बीच भँवर में,है घिरा इंसान।

सत्य पथ का त्याग है करतेछल कपट से वार।
दीन दुखी की दुखित व्यथा पर,घात बारंबार।
वर्तमान कलुषित करता है,झूठ पर अभिमान।
असमंजस के बीच भँवर में,है घिरा इंसान।

अस्मिता कहाँ है नारी की,है आज ये प्रश्न।
लुटती बाला न्याय माँगती,पाप करता जश्न।
कलयुग में नारी की रक्षा,कुछ रखे संज्ञान।
असमंजस के बीच भँवर में,है घिरा इंसान।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

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