Saturday, 18 April 2020

अमृतध्वनि छंद

आशा की अमृत वाणी...✍️

अमृतध्वनि छंद

लापरवाही देख लें,घटना होते जाय।
सब बच्चों को आज तो,वाहन ही है भाय।।
वाहन ही है,भाय जोश में,तेज चलाते।
नियम बने जो,नित्य तोड़ते,मजे उड़ाते।।
आशा कहती,अपनाते है,तानाशाही।
अनहोनी घट,जाती सब है,लापरवाही।।

जीवन तो अनमोल है,जीवन के दिन चार।
है जो यातायात के,पढ़ें नियम का सार।।
पढ़ें नियम का,सार सभी फिर,पालन करलें।
दुर्घटना से,सदा बचे सब,सोच समझ लें।।
आशा कहती,ध्यान धरें सब,छोड़े खीवन।
गाँठ बाँध ले,जीना हमको,उत्तम जीवन।।

जल की कीमत जान लें,रखलें सदा सहेज।
नित्य तड़पते जल बिना,पुण्य कमाये भेज।।
पुण्य कमाये,भेज उन्हें जो,दीन दुखी है।
बड़े दूर से,पानी लाते,नही सुखी है।।
आशा वाणी,ये कहती है,जल दें हर पल।
व्यर्थ न होवें,कभी किसी के,हाथों से जल।।

निश्छल ममता माँ करे,ये जीवन आधार।
निर्मल मन से बाँटती,हृदय भाव से प्यार।
हृदय भाव से,प्यार बाँटकर,कर्म निभाती।
दुख सुख सहकर,कष्ट उठाकर,फर्ज सिखाती।
आशा वाणी,ये कहती है,रखती समता।
देवी मूरत,बसे अंर्तमन,निश्छल ममता।।

इस धरती में देव है,सारे नेक किसान।
भूख मिटे सब मनुज का,बोतें है वो धान।
बोतें है वो,धान अन्न जो,निसदिन खाते।
कठिन तपन को,नित्य सहें वो,कष्ट उठाते।
आशा वाणी,ये कहती है,इस जगती में।
यही भगवान,भूख मिटाते,इस धरती में।।

वाणी सुंदर नेक हो,कहते ये अनमोल।
सोच समझ के प्रेम से,बोलें मीठें बोल।
बोलें मीठे,बोल हृदय को,सुंदर भाता।
द्वेष कपट हो,दुश्मन भी हो,गले लगाता।
आशा वाणी,ये कहती है,अपने अंदर।
निर्मल पावन,जनहित बोलें,वाणी सुंदर।।

सदा अहम् की हार है,ऐसा दें संदेश।
प्रेम भाव अपनत्व से,मन का मिटता क्लेश।
मन का मिटता,क्लेश हृदय को,सुंदर रखता।
हो उदार जो,करुणा रखता,वो ही बढ़ता।
आशा वाणी,ये कहती हे,कर्म सर्वदा।
ध्यान धरें सब,काम बिगाड़े,ये अहम् सदा।।

इस धरती में देव है,सारे नेक किसान।
भूख मिटे सब मनुज का,उपजाते है धान।
उपजाते है,धान अन्न जो,निसदिन खाते।
कठिन तपन को,नित्य सहें वो,कष्ट उठाते।
आशा वाणी,ये कहती है,इस जगती में।
परम भगवान,भूख मिटाते,इस धरती में।।

वाणी सुंदर नेक हो,सबसे ये अनमोल।
सोच समझ के प्रेम से,बोलें मीठें बोल।
बोलें मीठे,बोल हृदय जो,सुंदर भाये।
द्वेष कपट हो,दुश्मन भी हो,गले लगाये।
आशा वाणी,ये कहती है,मन के अंदर।
निर्मल पावन,जनहित बोलें,वाणी सुंदर।।

नेक सृजन का सार हो,जग का हो उद्धार।
सुंदर नव पथ मार्ग पर,चले कलम की धार।।
चले कलम की-धार करे जो,नव उजियारा।
सुंदर कविता,गढ़ दें ऐसा,लागे न्यारा।।
आशा वाणी,ये कहती है,खुश हो जन मन।
कलम उठाकर,कवि सब रचदें,नव नेक सृजन।।


सदा अहम् की हार है,ऐसा दें संदेश।
प्रेम भाव अपनत्व से,मन का मिटता क्लेश।
मन का मिटता,क्लेश हृदय को,सुंदर रखता।
हो उदार जो,करुणा रखता,वो ही बढ़ता।
आशा वाणी,ये कहती हे,कर्म सर्वदा।
ध्यान धरें सब,काम बिगाड़े,ये अहम् सदा।

पारस होती बेटियाँ,इनसे घर संसार,
विश्व धरा की सार है,बाँटे निश्छल प्यार,
बाँटे निश्छल,प्यार सभी को,बाँधे रखती,
रिश्ते नाते,सदा निभाती,दुख सब सहती,
आशा वाणी,ये कहती है,देती साहस,
सदा रही है,सदा रहेगी,बेटी पारस।

शिक्षक तो वरदान है,धरती के अभिमान,
दिव्य ज्योत भंडार से,बाँटे निसदिन ज्ञान,
बाँटे निसदिन,ज्ञान दीप को,हृदय जलाते,
जिनगी गढ़ते,अँधकार को,दूर भगाते,
आशा वाणी,ये कहती है,सच्चा दीक्षक,
इस धरती पर,परम पूज्य है,सारे शिक्षक।।

लक्ष्य हमारा श्रेष्ठ हो,सुंदर हो सब राह,
जनहित अपना कर्म हो,जीवन की हो चाह,
जीवन की हो,चाह बने हम,कर्मठ ज्ञानी,
रोते जन को,सदा हँसाये,बनकर दानी,
आशा वाणी,ये कहती है,बने सहारा,
कष्ट मिटाना,एकमात्र हो,लक्ष्य हमारा।

बहुत बड़ी है आपदा,लाये प्रलय विशाल।
पल भर में सब खत्म हो,लाये सबका काल।
लाये सबका,काल सुनो जल,से भी खतरा।
घर न बनाये,समुद्र होवे,ज्यादा गहरा।
आशा वाणी,ये कहती है,दुखद घड़ी है।
बहकर मरते,यह विपदा भी,बहुत बड़ी है।

लक्ष्य हमारा श्रेष्ठ हो,सुंदर हो सब राह,
जनहित अपना कर्म हो,जीवन की हो चाह,
जीवन की हो,चाह बने हम,कर्मठ ज्ञानी,
रोते जन को,सदा हँसाये,बनकर दानी,
आशा वाणी,ये कहती है,बने सहारा,
कष्ट मिटाना,एकमात्र हो,लक्ष्य हमारा।

बहुत बड़ी है आपदा,जल का प्रलय विशाल।
पल भर में सब खत्म हो,लाये सबका काल।
लाये सबका,काल सुनो जल,से भी खतरा।
घर न बनाये,समुद्र होवे,ज्यादा गहरा।
आशा वाणी,ये कहती है,दुखद घड़ी है।
बहकर मरते,यह विपदा भी,बहुत बड़ी है।।

सदा योग से लाभ है,कहते है सब संत,
भोर भये शुभ काल में,बीमारी का अंत,
बीमारी का,अंत हृदय को,निर्मल रखता,
शुद्ध श्वास दे,रक्त तंत्र में,निसदिन बढ़ता,
आशा वाणी,ये कहती है,बहुत फायदा,
गुणकारी है,सेहत देती,यह योग सदा।

आडंबर में क्या धरा,धन का क्यों हो लोभ,
जब बिगड़े है काज तो,अनुभव होता क्षोभ,
अनुभव होता,क्षोभ तभी जब,काल बुलाता,
व्यर्थ किया था,लोभ सोचकर,प्राण गँवाता,
आशा वाणी,ये कहती है,मन अंतर में,
संयम रखलें,क्यों जीना है,आडंबर में।

वसुंधरा पर बेटियाँ,अनुपम है सौगात,
भ्रूण नाश अपराध है,ध्यान धरें ये बात,
ध्यान धरें ये,बात मान लें,पाप न करना,
भ्रूण नाश के,बुरे कृत्य से,हरपल बचना,
आशा कहती,व्यर्थ दिखावा,परंपरा पर,
बेटी है जो,अवतारी है,वसुंधरा पर।।

निर्धन जन के पीर को,देख बढ़ाये हाथ,
दुख पीड़ा में जल रहे,उनका दें दें साथ,
उनका दें दें,साथ अगर हम,सक्षम धन से,
अन्न दान कर,पुस्तक कापी,बाँटें मन से,
आशा कहती,धर्म निभाये,कर अभिवर्धन,
ज्ञान दान कर,बने सहारा,है जो निर्धन।

पुलिस प्रशासन को नमन,अंतस से सम्मान,
नित्य सुरक्षा दे रहे ,यही देश की शान,
यही देश की,शान फर्ज है,सदा निभाते,
कोरोना ये,हो न संक्रमित,ये सिखलाते,
आशा कहती,दीन दुखी को,देते राशन,
जन सेवा को,सदा निभातें,पुलिस प्रशासन।।

पुलिस सुरक्षा दे रही,फैली है चहुँओर,
अनुशासन के रोक पर,खड़ी रहे हर छोर,
खड़ी रहे हर,छोर रखें है,सब निगरानी,
डंडे पड़ते ,रोज करे है,जो मनमानी,
आशा कहती,करे न इनकी,कभी उपेक्षा,
तन मन देकर,हरपल करते,पुलिस सुरक्षा।

पानी जितना हो सके,घर पर खूब बचाय,
प्यासे को पानी मिले,ऐसा कुछ कर जाय,
ऐसा कुछ कर,जाय बचत की,राह बताएँ,
व्यर्थ गँवाते,है जन सबको,बचत कराएँ,
आशा कहती,ध्यान धरें औ,होवें ज्ञानी,
नित्य धरा पर,आज देखलो,घटता पानी।

पानी के इस मोल को,जन-जन समझे आज,
भोर भये माँगे सभी,होवे इससे काज,
होवे इससे,काज सभी को,यही समझना,
व्यर्थ गँवाकर,बाद पड़ेगा,खूब तरसना,
आशा कहती,कभी न करना,ये मनमानी,
जीवन देती,अमृत सदा से,होता पानी।

रक्त दान तो पुण्य है,नेकी का है कर्म,
सदा निभायें प्रेम से,मानवता का धर्म,
मानवता का,धर्म नेक जो,जीव बचाएँ,
पुण्य कमाले,रक्तदान की,सोच बनाएँ,
आशा कहती,पीड़ा देख न,बने अंजान,
जनहित में सब,सदा करावें,सब रक्त दान।

रक्त नित्य बनता सुनो,रखलो यह संज्ञान,
लाल रक्त के कण सभी,रक्त तंत्र में मान,
रक्त तंत्र में ,मान इसी से ,सेहत बनता,
डरे नही यह,बात समझलें,कभी न घटता,
आशा कहती,पौस्टिक खावें,सब रहे मस्त,
नित्य निरंतर,तन पर अपने,है बढ़े रक्त।।

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