Tuesday, 31 March 2020

मनहरण घनाक्षरी छंद

मनहरण घनाक्षरी छंद

हृदय भाव मांगती है,सबको वो चाहती है,
माँ कहलाती है वो,नेक वरदान है।
नेक कर्म करती है,प्रेम भाव रखती है,
देवी वह कहलाती,धरती की मान है।
निभाती है जिम्मेदारी,जग की है अवतारी,
सुरक्षा दे कोख में वो,जन्म सम्मान है।
आशा वाणी कहती है,शीश को सभी झुकाओ,
दुख सुख माँ निभाये,अनुपम ज्ञान है।।

रोला छंद-कोरोना विशेष

रोला छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना का रोग,देश में कैसा आया।
बीमारी का रूप,वायरस ये फैलाया।।
बिगड़ रहे हालात,नाश पल भर में करता।
लग जाये ये रोग,नित्य है मानुष मरता।।

फैलाया यह रोग,चीन ये देखो जानो।
खाते कच्चा मांस,रोग नव ये पहचानो।।
फैलै तुरंत अंग,हाथ न कभी मिलाना।
मास्क लगाओ रोज,ज्ञान की बात सिखाना।।

भीड़ भाड़ से दूर,मनुज पर है ये भारी,
जन जन फैला खूब,वायरस का बीमारी,
मुँह में रखें रुमाल,संक्रमित से ये बचाए,
बाहर कभी न जाय,स्पर्स से रोग लगाए।।

खाँसी संग जुकाम,जानलें यही निसानी,
गला करे है जाम,सांस बढ़े परेसानी,
चमगादड़ औ सांप,जान के चीनी खाते,
बिगड़ रहे हालात,देखकर समझ न पाते।

शहर विदेश व गाँव,देश का कोना कोना।
तड़प रहे सब लोग,घातक बना कोरोना।।
धोयें अपने हाथ,रोज साबुन से अपने।
रखना करना ध्यान,रोग न पाये पनपने।।

लहसुन खायें रोज,गरम पानी ही पीयें।
हल्दी तुलसी काट,शुद्ध भोजन से जीयें।।
करदो पूरा बंद,चीन का खाना पीना।
बिगड़े है हालात,त्यागकर अब है जीना।।

रोकथाम का काम,आज है डाक्टर करते,
मानें उनकी राय,जाँच से हम है बचते,
सर्दी छींक जुकाम,अगर बढ़ जाये सुनलो ,
तब करवाये जाँच,स्वस्थ तन खुद ही चुनलो ।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़



Monday, 30 March 2020

तातंक छंद गीत

तातंक छं गीत

देश प्रेम में कर्म करेंगे,सुंदर जग हो जाएगा,
अनुशासन के पालन से ही,नवपरिवर्तन आएगा।

द्वेष कपट को दूरभगाकर,मानवता को लाना है,
सत्य हृदय मे वास करे ये,नित्य हमें अपनाना है,
जब अनुशासित मानुष होगा,पाप पनप नही पाएगा,
देश प्रेम में कर्म करेगें,सुंदर जग हो जाएगा।

मातृ वंदना नित्य करें तो,मान बचेगा नारी का,
माँ बेटी औ बहन कहेगें,समझे मन अवतारी का,
नेक हदय का भाव रखेगें,तब मानव कहलाएगा
देश प्रेम में कर्म करेगें,सुंदर जग हो जाएगा।

अंतस मन से प्रण ये करलो,सारे भेद मिटाएगें,
निर्मलता को धारण करके,रिश्तें सभी निभाएगें,
नवपरिवर्तन करना हमको,मन में सोच समाएगा,
देश प्रेम में कर्म करेगें,सुंदर जग हो जाएगा।

रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Friday, 27 March 2020

गीत

गीत

पंक्षी उड़ते नील गगन मे,
           वृक्षो पर उसका डेरा है।
भटक रहे है इधर उधर वो,
          मानव बन गया लुटेरा है।

तिनका तिनका ढूँढ ढ़ूँढ कर,
        वह अपना नीड़ बनाती है।
नव बच्चे को वहाँ बिठाकर,
      फिर भोजन ढूँढने जाती है।
वापस आकर नयन खोंजतें,
    दिखें नही अब कहाँ बसेरा है।
पंक्षी उड़ते नील गगन मे,
           वृक्षो पर उसका डेरा है।

इधर उधर वो फुदक कुदक कर,
         चीं चीं करती तड़प रही है।
पेड़ कहाँ वो जिसपे मेरा,
          नीड़ बना था कहीं नही है।
माँ की आँखो में आसूँ है,
          चहुँओर छा गया अँधेरा है।
पंक्षी उड़ते नील गगन में,
              वृक्षो पर उसका डेरा है।

लोभ मोह में जलते मानुष,
              वृक्ष काटता वो जाता है।
कोलाहल पंक्षियों का घटे,
           क्यों वो आँक नही पाता है।
जंगल घटते आज देखलो,
               लालच ने सबको घेरा है।
पंक्षी उड़ते नील गगन में,
                 वृक्षो पर उसका डेरा है।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद

गीत

गीत लेखन दिवस
दिनाँक-09.03.2020

पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे,
मैं तो भीगी पिया जी के रंग,खूब खेलूँ होली रे।।

मैं कुछ इतराऊँ कुछ बलखाऊँ,नैन जब टकराये जी,
आएँ मुख पर जब गुलाल मलने,मन बहुत शर्माये जी,
लगता जैसै सारी ये खुशियाँ,आज भरती झोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने,मन बिछा रंगोली रे।

इस होली की है बात निराली,मन आज सुंदर लागे है,
जहाँ भागते है पिय मस्ती में,मन मधुर ये भागे है,
हृदय भाव पुलकित मुस्काता,मन प्रेम की रोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे।

साजन मुझको आज रंग दो जी,प्रेम अगाड़ गहरा हो,
तेरे नाम के सभी रंग गुलाल हो,मन रंग का पहरा हो,
नित्य घेरकर चिढ़ा रही सखियाँ,छेड़ते है हमजोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सार छंद गीत

सार छंद गीत -श्रीमती आशा आजाद

आया सुंदर आज देख लो,रंग भरा ये होली।
रंग भरे पिचकारी ले लो,आओ रे हमजोली।।

छेड़ो सबझन साज नगाड़ा,गाओ मिल जुल गाना।
बिछा रहे रंगोली जैसै,मौसम लगे सुहाना।
मीठी वाणी हृदय लुभाये,बोलें ऐसी बोली।
रंग भरे पिचकारी ले लो,आओ रे हमजोली।।

हरा लाल नारंगी सुंदर,नीला पीला डालो।
ढोल नगाड़ा बजते जाए,गीत प्रेम के गालो।
तान लगाके सब झन बोलो,होली है जी होली।
रंग भरे पिचकारी ले लो,आओ रे हमजोली।।

होली है भाई होली है,तान लगाकर घूमो।
रंग बिरंगी इस धरती को,माथ नवा कर चूमो।
आनंदित हो जाए हर क्षण,सुंदर हँसी ठिठोली।
रंग भरे पिचकारी ले लो,आओ रे हमजोली।।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




छप्पय छंद


छप्पय छंद - श्रीमती आशा आजाद

प्रीत बड़ा तड़पाय,हृदय व्याकुल है मेरा।
तकती हूँ मै राह,रात से हुआ सवेंरा।।
इन नैनों को आस,नीर है झर झर बहते।
तन्हा बीते रैन,राह को तकते रहते।
मेरे मन की यह व्यथा,सुनते सारे लोग है।
दीवानी सी फिर रही,दर्द भरा ये रोग है।।

सखियों का वह शोर,अब न भाये सजना।
भूख प्यास सब त्याग,भूल गई मैं सँवरना।।
मुझको विरह सताय,सोच में निसदिन रहती।
अश्क बने अंगार,सनम आओ ये कहती।।
मेरी है यह दुर्दशा,हर क्षण जपती नाम हूँ।
आकर मुझको थाम लो,देती ये पैगाम हूँ।।

रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद

अमृतध्वनि छंद

अमृतध्वनि छंद - श्रीमती आशा आजाद

नेक सृजन का सार हो,जग का हो उद्धार।
सुंदर नव पथ मार्ग पर,चले कलम की धार।।
चले कलम की-धार करे जो,नव उजियारा।
सुंदर कविता,गढ़ दें ऐसा,लागे न्यारा।।
कह आशा कवि,हृदय भाव से,खुश हो जन मन।
कलम उठाकर,कवि सब रचदें,नव नेक सृजन।।

रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़