रोला छंद - श्रीमती आशा आजाद
कोरोना का रोग,देश में कैसा आया।
बीमारी का रूप,वायरस ये फैलाया।।
बिगड़ रहे हालात,नाश पल भर में करता।
लग जाये ये रोग,नित्य है मानुष मरता।।
फैलाया यह रोग,चीन ये देखो जानो।
खाते कच्चा मांस,रोग नव ये पहचानो।।
फैलै तुरंत अंग,हाथ न कभी मिलाना।
मास्क लगाओ रोज,ज्ञान की बात सिखाना।।
भीड़ भाड़ से दूर,मनुज पर है ये भारी,
जन जन फैला खूब,वायरस का बीमारी,
मुँह में रखें रुमाल,संक्रमित से ये बचाए,
बाहर कभी न जाय,स्पर्स से रोग लगाए।।
खाँसी संग जुकाम,जानलें यही निसानी,
गला करे है जाम,सांस बढ़े परेसानी,
चमगादड़ औ सांप,जान के चीनी खाते,
बिगड़ रहे हालात,देखकर समझ न पाते।
शहर विदेश व गाँव,देश का कोना कोना।
तड़प रहे सब लोग,घातक बना कोरोना।।
धोयें अपने हाथ,रोज साबुन से अपने।
रखना करना ध्यान,रोग न पाये पनपने।।
लहसुन खायें रोज,गरम पानी ही पीयें।
हल्दी तुलसी काट,शुद्ध भोजन से जीयें।।
करदो पूरा बंद,चीन का खाना पीना।
बिगड़े है हालात,त्यागकर अब है जीना।।
रोकथाम का काम,आज है डाक्टर करते,
मानें उनकी राय,जाँच से हम है बचते,
सर्दी छींक जुकाम,अगर बढ़ जाये सुनलो ,
तब करवाये जाँच,स्वस्थ तन खुद ही चुनलो ।
छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़