अमृतध्वनि छंद - श्रीमती आशा आजाद
नेक सृजन का सार हो,जग का हो उद्धार।
सुंदर नव पथ मार्ग पर,चले कलम की धार।।
चले कलम की-धार करे जो,नव उजियारा।
सुंदर कविता,गढ़ दें ऐसा,लागे न्यारा।।
कह आशा कवि,हृदय भाव से,खुश हो जन मन।
कलम उठाकर,कवि सब रचदें,नव नेक सृजन।।
रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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