कुकुभ छंद गीत
भारत के सच्चे सेनानी,सबका मान बढ़ाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।
है शहीद कितने भारत में,कितना रक्त बहाया है,
हिंदुस्तान की शान बान में,मरकर फर्ज निभाया है,
साहस रखकर फर्ज निभाते,दुश्मन मार गिराते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।
घर पर बैठी घरवाली जो,अपना फर्ज निभाती है,
बच्चे उनके नित्य तरसते,पालन श्रेय उठाती है,
हुए वीरगति को सुनकर,अपना होश गवाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।
जंगल झाड़ी गर्मी सर्दी, तन पर कितना सहते है,
रात रात भर जाग जाग कर,रक्षा सबकी करते है,
हम बैठै है घर पर अपने,सरहद पर सो जाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।
शत्रु को घुसने ना देते,सीमा पर नजर गड़ाया है,
भूख प्यास का होश कहाँ जब,भारत पर बन आया है,
भारत माता की रक्षा को,लहूँ सदा दे जाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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