कुकुभ छंद गीत - दिव्यांग बच्चे
मन के हम है सच्चे सुंदर,अपनी मीठी भाषा है,
नही दिव्यांग मन के सुनलो,मंजिल की अभिलाषा है।
नेक कर्म करने की चाहत,सदा जोश हम रखते है,
नही किसी के पाँव मगर हम,मन से नित हम चलते है
नही कमजोर हाथ नही जो,मन अपनी परिभाषा है,
नही दिव्यांग मन के सुनलो,मंजिल की अभिलाषा है।
भेदभाव को दूर भगाये,सच्चे मन को पहचाने,
मानवता के पथ पर चलना,कर्म समझ अपना जाने,
समता का नित भाव धरें सब, जैसै राष्ट्रभाषा है,
नही दिव्यांग मन के सुनलो,मंजिल की अभिलाषा है।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
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