दोहा मुक्तक लेखन दिवस..
*दीप जले घर आँगना,सुंदर हो त्योहार,*
*द्वेष कपट सब त्याग कर सुखी करें संसार;*
*प्रेम भाव के तेल से जीवन बने उजास,*
*दुख से ना हो सामना फैलै निसदिन प्यार।*
*प्रेम भाव को थाम कर नव भरदें उल्लास,*
*दीन दुखी के साथ चल जीतें नव विश्वास;*
*हृदय भाव से जो करे दीप दान का काज,*
*ऐसी हो नित आराधना कोई हो न उदास।*
*मात पिता के पाँव को समझें अपना धर्म,*
*भाई बहन का साथ दें समझे अपना कर्म,*
*हृदय से स्वीकार लें सत्य नेक पथ राह,*
*दुखियों की पीड़ा हरें जानें उनका मर्म।*
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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