*बेघर बच्चे*
बेघर बच्चे देख लो,रखलो उनका मान।
इस दीवाली प्रेम से,सबको दो सम्मान।।
तड़प रहे है भूख से,वस्त्र फटे है जान।
दीवाली की चाह ना,ना कोई अरमान।।
कितने अनाथ होय है,यह ना जाने कोय।
जन्म देय जीवन नया,फिर क्यों उनको खोय।।
देख रहे पकवान को,लालच करते रोज।
वीराना घर जान ले,नित भोजन की खोज।।
बिलख रहे यह जान ले,देखें अब हालात।
दीवाली पर दें नया,उनको भी सौगात।।
जगमग देखें रौशनी,किस्मत कोषे जान।
मात पिता की भूल से,टूटे सब अरमान।।
स्नेह प्रेम के ज्योत से,जीवन करे उजास।
जीवन में सब डाल दे,देेय खुशी उल्लास।
बेघर होना पाप नही,उनका ना है दोष।
देय जन्म फिर छोड़ते,उनपर ही ये रोष।।
इस दीवाली दान दो,करना परोपकार।
बेघर बच्चें जब हसें,वो ही है उपहार।।
मात पिता की कामना,हर जीवन का चाह।
*आशा* तू भी साथ दे,उनको दे नव राह।।
आशा आजाद....✍
कोरबा छत्तीसगढ़
Nice mam 📝📝👌👌
ReplyDelete##Bahot khubbb
ReplyDelete##Bahot khubbb
ReplyDeleteवाह वाह आशा बहन,बढिया दोहे
ReplyDeleteBahut achchhi kavita likhi ho aasha
ReplyDeleteNice �� poetry ✍ Mam!
ReplyDeleteBahut sunder chachi ji
ReplyDeleteBahut sunder chachi ji
ReplyDeleteआप सभी का धन्यवाद
ReplyDelete