Sunday, 5 August 2018

आशा के सरसी छंद...कविता

*कविता नही है देन किसी की,याद रखो ये बात।*
*कवि की लेखन निर्मल होती,है ना कोई जात।।*

*कविता है आवाज हृदय की,सृजन भाव आधार।*
*जो लिखते है हृदय भाव से,वो है साहित्यकार।।*

*कविता देती नित नव राहें,लेखन करे उद्धार।*
*जन जन तक नव कविता पहुँचे,सदा हो परोपकार।।*

*कविता रचना हो ऐसा सुन,सबका करें विकास।*
*भाईचारा जो गढ़दे वो,कविता उसकी दास।।*

*कविता का सम्मान करो सब,करो साधना रोज।*
*घट रहा जो वर्तमान में,वही सृजन का ओज।।*

*कविता में निस्वार्थ भावना,लेखन का आगाज।*
*जन का नव उद्धार करे हम,दे समता आवाज।।*

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