Sunday, 5 August 2018

अब तो धरती पर अवतार लो माँ

सिंह आसन अब तो त्याग कर दो माँ,
धरती पर तुम आकर अवतार लो माँ;
हो रहा नारीयों पर आज जो अत्याचार,
आकर उन सबका तुम संहार करो माँ।
*अब तो धरती पर अवतार लो माँ....🙏🏼*

एक नन्हीं सी परी जो धरती पर आई माँ,
जी भर कर भी वो मुस्कुरा नही पाई माँ;
हो रहा आत्मघात जिन मासूमो पर आज,
अत्याचारी का जड़ से अब संहार करो माँ।
*अब तो धरती पर अवतार लो माँ....🙏🏼*

विश्वास में नारी को आज छला जा रहा माँ,
पग पग घिनौने कृत्य को रचा जा रहा है माँ;
राक्षसो का जिस तरह तूने संहार किया था,
आकर नारी को ऐसा ही नव वरदान दो माँ।
*अब तो धरती पर अवतार लो माँ....🙏🏼*

कभी नारी को बंदी बनाकर रख लेते है माँ,
कभी पाठशाला में तमाशा बन जाता है माँ;
अकेली तन्हां राहों में लुट रही मेरी अस्मत,
आकर सुरक्षा का आगाज तुम लगा दो माँ।
*अब तो धरती पर अवतार लो माँ....🙏🏼*

मैं स्कूल की बच्ची शिक्षा को पाने चली माँ,
मंदिर की सिड़ियों को प्रणाम कर चली माँ;
घेर लेते है महिसासुर जैसै पापी हर राह मुझे,
आकर नारी की सुरक्षा का आधार बनो माँ।
*अब तो धरती पर अवतार लो माँ....🙏🏼*

अब तो आकर नारी को ये अभयदान दो माँ,
अतःमन से नारी का सम्मान सबमें भर दो माँ;
भारत की इस धरती पर नारी की ये पुकार है,
नव रूप नव शस्त्रों को आकर प्रदान करो माँ।
*अब तो धरती पर अवतार लो माँ....🙏🏼*

नव दिन नवरात्र में नव रूप का संचार करो माँ,
विश्वजगत में नारी का तिरस्कार हर लो ना माँ;
एकता समरूपता का नाम रहे जगत में केवल,
ऐसा सुंदर संस्कार प्यार का अभयदान दो माँ।
*अब तो धरती पर अवतार लो माँ....🙏🏼*

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