Sunday, 5 August 2018

आशा के सरसी छंद..पानी बिन जीव हो कैसै

*पानी बिन जीवन हो कैसै,गाठ बांधले बात।*
*बचत ध्यान से पानी करलो,क्यों बहाए दिन रात।*💧

*पानी के गुण को सब जानो,ये जीवन आधार।*
*पानी बिन मानुष सुनले तू,जिनगी है बेकार।।*💧

*अमृत है पानी जीवन में,बचत करौं दिन रात।*
*लापरवाही क्यों करते हो,सुन दुखिया की बात।।*💧

*जिनके घर में पानी नहिं है,उनपर कर उपकार।*
*दूर गांव से पानी लाते,उनकी सुनो गुहार।।*💧

*गंदे पानी पीते है जो,पीड़ा रहे अपार।*
*बीमारी से मर जाते है, उनका कर उद्धार।।*💧

*लापरवाही करते है जो,व्यर्थ गवांते नीर।*
*बिन पानी के गरीब भुगते,हो बीमार शरीर।।*💧

*बूंद बूंद पानी सहेज लो,कीमत इसकी जान।*
*दानी बन जा पानी देकर,ये है काम महान।।*💧

*पानी बिन ना कोई तरसे,रखना तू संभाल।*
*व्यर्थ कभी ना पानी करना,सबका रखना ख्याल।।*💧

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