Saturday, 4 August 2018

आशा की कविता...तू आ गया बेटा


तुझे देखने को आँखें है तरसती,
आँखो में आँसू मेरी नहीं थमती;
जिसने जना है कोख से तुझे बेटा,
वही तेरे आने की आस है करती।
तू आ गया बेटा.....

तूने क्यों मुझको नहीं जाना बेटा,
माँ के दिल को नहीं पहचाना बेटा;
अमृत की धारा तुझपर बहा दिया,
क्यों मुझे तू इतना रूला गया बेटा;
तू आ गया बेटा....

आजा बेटा आस लगी तेरे आने की,
समय आ गया अब तो मेरे जाने की;
अब तो आँखे भी धुँधली सी पड़ गई,
कही छूट ना जाए डोर मेरे सासों की,
तू आ गया बेटा....

तुझे मैनै पाला अपना फर्ज समझकर,
आजा तू मुझपर अपना कर्ज समझकर;
आके फैलादें मुझपर तू अपनी बाँहें बेटा,
जी उठेगी तुझे देख नव जन्म समझकर।
तू आ गया बेटा...

तू अभी मेरे अभी लिए बहुत है छोटा,
मौत के दरवाजे अब मैं खड़ी हूँ बेटा;
अब तो जिस्म से रूह निकल गई सुन,
अब मेरी रूह ने भी बस इतना ही कहा।
तू आ गया बेटा ......
तू आ गया बेटा.....

No comments:

Post a Comment