सुंदरता का ज्ञान
सुन आशा ! मुझसे ग्रहण कर, सुंदरता का ज्ञान,
*आशा* ना करना कभी, भूले से भी अभिमान।
कर्म महत्ता जानकर,सत्कर्म का करना पहचान,
मानवता का भाव रख,इंसानियत का रखना मान।
भूख से पिड़ितो का तू,सुन करना सदा सम्मान,
खुद भूखी रहकर भी,अन्न का सदा करना दान।
दीन दुखियों का सहारा बन,करना तू काम महान,
तेरे सत्कर्म को सराहें,सदा ही ये सारा जहान।
कुरूप मन के भीतर जाकर,करना उसका बखान
रूप की चमक देखकर तू,करना ना झूठा गुनगान।
लालच के मोहमाया का, रखना तू सदा ही ज्ञान
संतुष्टि का जो अनादर करे,उनमें होता है अज्ञान।
नमन कर हृदय को अपने,सुंदरता का है ये ज्ञान,
प्रेम भाव सर्मपण का, रखना तू सदा ही मान।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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