Thursday, 17 September 2020

सरसी छंद-शिक्षक

सरसी छंद-शिक्षक


शिक्षक

*शिक्षक है अभिमान देश के, याद रखो ये बात ।*

*गुरु का मन निर्मल होता है, ना है कोई जात ।।*


*शिक्षक है आवाज हृदय की, सृजन भाव आधार ।*

*शिक्षा देकर जीवन गढ़ते, करते है उद्धार ।।*


*शिक्षक देते नित नव राहें, विद्या का आधार ।*

*देकर शिक्षा देखो हर युग, किया सदा उपकार ।।*


*शिक्षा से शिक्षक बन जाते, सबका करें विकास ।*

*नेक भाव से ज्ञान है देते, गुरु ही जग की आस ।।*


*शिक्षक का सम्मान करो सब, करो साधना रोज ।*

गुरु के मुख से सत ही निकले,रखें सत्य का ओज ।।


*शिक्षक में निस्वार्थ भावना,नित् करते आगाज।*

*हर जन का उद्धार करे ये,दे समता आवाज।।*


आशा आजाद...✍

कोरबा छत्तीसगढ़

दोहावली-हिंदी भाषा

सरसी छंद-हिंदी मातृभाषा है अभिमान


हिंदी है अभिमान देश का, विश्व करे सम्मान ।

हिंदी लेखन मान बढ़ाता, हृदय भाव की शान ।।


हिंदी है आवाज हृदय की,सृजन भाव आधार।

हिंदी लेखन श्रेष्ठ जगत में, करे सदा उद्धार।।


हिंदी भाषा यही सिखाती, रखें प्रेम का भाव ।

बाँटें शिक्षा हिंदी में हम, कभी न हो अलगाव ।।


हिंदी से हम ज्ञानी बनते, करते नित्य विकास ।

नेक भाव से हिंदी सीखें, भरे हृदय उल्लास ।।


हिंदी का सम्मान करें सब, करें नित्य संचार ।

हिंदी भाषा मेल बढ़ाये, इससे ही उद्धार ।।


हिंदी में नित काव्य गढ़े, एक रहे आगाज ।

जन-जन तक हिंदी पहुँचाये, मानवता का साज ।


हिंदी भाषा हृदय बसाकर, नित्य बढ़ायें प्रेम ।

जन हित का उद्धार करे ये, सदा रहे सब क्षेम ।।


रचनाकार - आशा आजाद कृति

मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


बहुजन महापुरुषों की गाथा

बाबा अम्बेडकर लाइव


करती हूँ नमन सबको

बहुजन भाई को

मातु बहन सबको


समता संग लाई हूँ

मानवता का मैं

संदेशा लाई हूँ


बाबा ने सिखाया है

शिक्षा पथ चलनान

नव मार्ग दिखाया है


कुकुभ छंद छंद - श्रीमती आशा आजाद


ज्ञानी सबसे बढ़कर बाबा,पढ़ लिख जाओ सिखलाया।

स्वयं अकेला कठिन राह पर,चलकर हमको दिखलाया।।


भेदभाव को सभी मिटाके,संविधान लिख छोड़ा है,

सकल जगत में मान देखलो,जात पात सब तोड़ा है।

स्वाभिमान के खातिर लड़ना,हक को अपने बतलाया।

स्वयं अकेला कठिन राह पर,चलकर हमको दिखलाया।।


शिक्षा का नव अलख जगाके,किया देश में उजियारा।

छूआछूत न होगा जग में,,दूर किया सब अँधियारा।

नेक विचारों को स्वीकारा ,बौद्ध धर्म फिर अपनाया।

स्वयं अकेला कठिन राह पर,चलकर हमको दिखलाया।।


दीन हीन शोषित लोगों की,समझी पीड़ा परेशानी ।

दलित जाति का हीरा बेटा,संविधान लिखना ठानी ।

जात पात से ऊपर लाकर,समता का पंचम लहराया ।

स्वयं अकेला कठिन राह पर,चलकर हमको दिखलाया।।


याद रखें बाबा की वाणी,समता रखकर बढ़ जाओ।

राह मेहनत का बस होवें,कर्म करो मंजिल पाओ।

भेदभाव की पीड़ा सहकर,बाबा ने मंजिल पाया।

स्वयं अकेला कठिन राह पर,चलकर हमको दिखलाया।।


बाबा के संघर्ष कर्म से, सुंदर आज हमारा है।

शिक्षित होकर आगे बढ़ना,फर्ज यही तुम्हारा है।

सकल जगत में एकमात्र बस,उनको शिक्षा ही भाया।

स्वयं अकेला कठिन राह पर,चलकर हमको दिखलाया।।

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बाबा गुरुघासीदास

कुकुभ छंद गीत


छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।

सच्चा मनखे बाबा राहिस,उँखर ज्ञान ला जग गावै।।


समता के नित पाठ पढ़ायिस,अबड़ रहिन जी ओ ज्ञानी।

गिरौधपुरी म जनम लिहिस जी,नेक संदेश के बानी।।

मंहगूदास के राहिन बेटा,अमरौतिन माँ कहलावै।

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।


जात पात के घोर विरोधी,ओखर पढ़लौ सब गाथा ।

छत्तीसगढ़ म जनम लिये ले,भुइयाँ के चमकिस माथा।

डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै।

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।


बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,जप तप ले बनगे ज्ञानी ।

मनखे मनखे एक रहौ जी,सत्य नाम अमरित बानी।

समता के उजियारा करके,अंतस मन जोत जलावै।

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।


छूआछूत के भेद मिटाये,सरल सधारन ओ प्रानी।

छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी।

हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै।

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।

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बाबा अम्बेडकर...


शिक्षित होकर सब बढ़ें,करे देश का नाम।

पिछड़े सारे आज जो,सदा बनाएँ काम।।

सदा बनाएँ,काम श्रेष्ठ है,लिखना पढ़ना।

बाबा बोले, हाथ स्वयं के,जीवन गढ़ना।

आज समय है,कुछ न मिलेगा,इसको खोकर

मान प्रतिष्ठा,सभी मिलेगा,शिक्षित होकर।।

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सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद


प्रथम शिक्षिका कहलाती है, ज्ञान दिया सौगात ।

मान शान सावित्रीबाई, याद रखो ये बात ।।


पति ज्योतिबा फुले जिनको, कहते गुण का खान ।

नेक ज्ञान को नित्य बहाके, किया देश उत्थान ।

बहुजन के उत्थान ध्यान में,दिन देखा नहिं रात ।

मान शान सावित्रीबाई,याद रखो ये बात ।।


दलित जाति को शिक्षित करना, यही एक था कर्म ।

महिलाओं को ज्ञान बाँटना, यही निभाया धर्म ।

कष्ट बहुत झेला माता ने, हुआ बहुत था घात ।

मान शान सावित्रीबाई, याद रखो ये बात ।।


कुछ मानव थे घोर विरोधी, बुरा किया व्यवहार ।

हिम्मत से वो महानायिका, बनी सत्य की सार ।

वर्तमान में नित्य बढ़ा है, शिक्षा के अनुपात 

मान शान सावित्रीबाई,याद रखो ये बात ।

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रोला छंद-मायावती जी


मायावती महान,बहुत साहस है मन में।

बहुजन जन की शान,तनिक भी डर नहिं तन में।

दलित जाति उत्थान,सदा ये ध्येय बनाया।

इस धरती की मान,ज्ञान का दीप जलाया।।


सदा बढ़ाया हाथ,पीर दलितों का जाना।

हो नारी सम्मान,कष्ट से उसे बचाना।

नेक किया सब कर्म,धर्म मानवता चुनकर।

निभा रही कर्तव्य,आयरन लेडी बनकर।

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माननीय कांसीराम जी...


कांसीराम जी थे ज्ञानी,सुंदर गुण के खान,

अंतस मन में दीप जलाकर,किया देश उत्थान,

बहुजन का उद्धार किया था,दिन देखा नहिं रात,

दलित जाति का हीरा बेटा,अनुपम सब अभिदान।


दलित जाति को शिक्षित करना,यही बना बस कर्म,

महिला को सम्मान दिलाना,समझा अपना धर्म,

किया साइकिल पर खूब सवारी ,दी साहस सौगात,

बहुजन की पीड़ा को जाना,समझा उनका मर्म।

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रविदास जी


आडंबर मत करना

रविदास कहे है

लोभ से सब डरना


जात पात सब भूलो

रक्त एक सभी का

मन से मन छूलो


मैं मोची हूँ जानो

कर्म सृजन का पथ

गढ़ता पहचानो

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हे कबीर कविराज,जगत के ओ उजियारा।

नेक दिहिन संदेश,मिटाइस मन अँधियारा।

कासी रहिस निवास,बोल नित सत ग़ुड़ भाखा।

बोलय संत कबीर,करम बस हिरदे राखा।।


गुरुवर रामानंद,कबीर सत पथ म चलके।

करदिन जनकल्यान,काव्यधारा मा बह के।

शब्द शब्द ला तोल,छंद दिन आनी बानी।

जानौ संत कबीर,रहिस जी अब्बड़ ज्ञानी।।


कासी ठउर कहाय,ज्ञान ला जग हा गावै ।

भक्तिकाल कविराज,कबीर गुन हिरदे भावै।।

सरल सहज हे बोल,छंद के अमरित धारा।

गुनलौ ये संदेश,करम बस आप सहारा।।


रखौ काज मा ध्यान,रूप ह काम नइ आवै।

ध्यान धरौ ए बात,काज हा बढ़खा हावै।

पोथी पढ़लौ आज,मिलै कुछु नइ जी काही ।

ढाई आखर प्रेम,जगत मा मान बढ़ाही।।


अहंकार के भाव,त्याग के जीना होही।

लोभ कपट के भाव,द्वेष मा सबकुछ खोही।

कपट छलावा द्वेष,त्याग दव कहे कबीरा।

पाछु बड़ पछतावय,रहत हे जेन अधीरा।।

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दोहावली-शांत चित्त मन(विश्व शांति दिवस)

आशा की अमृतवाणी


दोहावली- शांत चित्त मन


शांत चित्त मन को रखें, क्रोध बिगाड़े काम ।

जोश द्वेष की आग से, बुरा हुआ अंजाम ।।


शांत हृदय के भाव हो, सरल बने सब काज ।

सुखमय जीवन के लिए, धैर्य बने आगाज ।।


शांत रहे मन सीख दें, मृदुवाणी संवाद ।

निर्मल पावन मन धरें, रखें जिसे सब याद ।।


शीतलता दें क्रोध को, ऐसा होवै कार्य ।

प्रेम बढ़े जिस बात से, बात करें वो धार्य ।।


विश्व शांति की राह ही, अपना हो आधार ।

धृणा भाव को सब तजे, करें नेक व्यवहार ।।


जिम्मेदारी बहुत है, रहता हृदय अशांत ।

मानव व्याकुल हो रहा, ढूँढ रहा एकांत ।।


आओ मिलकर प्रण करें, होगें नही हताश ।

हर मुश्किल में शांत रह, अंतर भरें प्रकाश ।।


रचनाकार-आशा आजाद"कृति"