Thursday, 17 September 2020

सरसी छंद-शिक्षक

सरसी छंद-शिक्षक


शिक्षक

*शिक्षक है अभिमान देश के, याद रखो ये बात ।*

*गुरु का मन निर्मल होता है, ना है कोई जात ।।*


*शिक्षक है आवाज हृदय की, सृजन भाव आधार ।*

*शिक्षा देकर जीवन गढ़ते, करते है उद्धार ।।*


*शिक्षक देते नित नव राहें, विद्या का आधार ।*

*देकर शिक्षा देखो हर युग, किया सदा उपकार ।।*


*शिक्षा से शिक्षक बन जाते, सबका करें विकास ।*

*नेक भाव से ज्ञान है देते, गुरु ही जग की आस ।।*


*शिक्षक का सम्मान करो सब, करो साधना रोज ।*

गुरु के मुख से सत ही निकले,रखें सत्य का ओज ।।


*शिक्षक में निस्वार्थ भावना,नित् करते आगाज।*

*हर जन का उद्धार करे ये,दे समता आवाज।।*


आशा आजाद...✍

कोरबा छत्तीसगढ़

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