सरसी छंद-शिक्षक
शिक्षक
*शिक्षक है अभिमान देश के, याद रखो ये बात ।*
*गुरु का मन निर्मल होता है, ना है कोई जात ।।*
*शिक्षक है आवाज हृदय की, सृजन भाव आधार ।*
*शिक्षा देकर जीवन गढ़ते, करते है उद्धार ।।*
*शिक्षक देते नित नव राहें, विद्या का आधार ।*
*देकर शिक्षा देखो हर युग, किया सदा उपकार ।।*
*शिक्षा से शिक्षक बन जाते, सबका करें विकास ।*
*नेक भाव से ज्ञान है देते, गुरु ही जग की आस ।।*
*शिक्षक का सम्मान करो सब, करो साधना रोज ।*
गुरु के मुख से सत ही निकले,रखें सत्य का ओज ।।
*शिक्षक में निस्वार्थ भावना,नित् करते आगाज।*
*हर जन का उद्धार करे ये,दे समता आवाज।।*
आशा आजाद...✍
कोरबा छत्तीसगढ़
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