आशा की अमृतवाणी
दोहावली- शांत चित्त मन
शांत चित्त मन को रखें, क्रोध बिगाड़े काम ।
जोश द्वेष की आग से, बुरा हुआ अंजाम ।।
शांत हृदय के भाव हो, सरल बने सब काज ।
सुखमय जीवन के लिए, धैर्य बने आगाज ।।
शांत रहे मन सीख दें, मृदुवाणी संवाद ।
निर्मल पावन मन धरें, रखें जिसे सब याद ।।
शीतलता दें क्रोध को, ऐसा होवै कार्य ।
प्रेम बढ़े जिस बात से, बात करें वो धार्य ।।
विश्व शांति की राह ही, अपना हो आधार ।
धृणा भाव को सब तजे, करें नेक व्यवहार ।।
जिम्मेदारी बहुत है, रहता हृदय अशांत ।
मानव व्याकुल हो रहा, ढूँढ रहा एकांत ।।
आओ मिलकर प्रण करें, होगें नही हताश ।
हर मुश्किल में शांत रह, अंतर भरें प्रकाश ।।
रचनाकार-आशा आजाद"कृति"
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