Monday, 3 August 2020

मनहरण घनाक्षरी नारी


मनहरण घनाक्षरी

*नारी की पीड़ा न जाने,मान को न पहचाने,*
*अनाचार खूब करें,कैसा अपमान है।*
*माँ की कद्र भूले सभी,बहन न माना कभी,*
*मर्यादा समझे नही,पापी इंसान है।*
*कहाँ जाये आज नारी,घेरे उसे अत्याचारी,*
*तड़प तड़प देती,अपनी वो जान है।*
*अस्मत कैसै बचायें, विश्वास कहाँ पायें,*
*मानुष होते पाप को,देख अनजान है।*

*कुंठित मानसिकता,लूटते नित्य अस्मिता,*
*मानवता भूले सभी,होता अत्याचार है।*
*नारी की ये दुख व्यथा,सुधारे सारी व्यवस्था,*
*नारी पढ़ लिख के भी,कितनी लाचार है।*
*घिनौने कृत्य क्यों करें,हृदय सम्मान भरें,*
*मान ही तो नारी का ये,श्रेष्ठ उपहार है।*
*कलुषित मत करो,मानवता नित्य धरो,*
*माँ बेटी बहन सभी,रिश्तें उपहार है।*

आशा आजाद...✍️

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