Monday, 3 August 2020

मुशी प्रेमचंद

दोहावली- मुंशी प्रेमचंद

प्रेमचंद जी को नमन,सकल जगत की शान।
अनुपम सभी कहानियाँ,देते सुंदर ज्ञान।।

उपन्यास में सार है,सुंदर नव संदेश।
अंतर मन भी तृप्त हो,पढ़कर मिटता क्लेश।।

अनुपम सारी पटकथा,सुंदर सारे पात्र।
अनुपम सभी निबंध जो,पढ़ते अब भी छात्र।

नेक विचारक देश के,कहता सकल समाज।
तोड़ो सभी कुरीतियाँ,यही रहा आगाज।।

नेक कहानी प्रेरणा,रचा पूस की रात।
ऐसा लगता पात्र सब,सुंदर करते बात।।

कर्मभूमि औ निर्मला,उपन्यास अनमोल।
रंगभूमि गोदान में,भाव भरे हर बोल।।

विधवा विवाह पथ चलो,त्यागो छूआछूत।
तोड़ो दहेज की प्रथा,सच्चा बनो सपूत।।

नाटक सुंदर सृष्टि है,और रचा संग्राम।
अदबे अकबर को लिखा,हिंदुस्तान के नाम।।

इक्तिफाक ताकत रचा,लेख सृजन अनमोल।
ज्ञान सार सुंदर गढ़ा,पढ़ मन जाता डोल।।

सैलानी बंदर रचा,बाल कहानी भाय।
पागल हाथी मस्त है,पढ़ बच्चे मुस्काय।।

रचनाकार-आशा आजाद
पता -कोरबा छत्तीसगढ़





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