दोहा गज़ल दिवस
रोजगार तो मिला नही,बने खिलौना लोग।
नेता डूबे लोभ में,उनका है सुख योग।।
पढ़े लिखे अनपड़ हुये,जोत रहे है खेत।
अनपड़ बैठै आज तो,सुख सत्ता का भोग ।।
डिग्री लेकर क्या करें,कहाँ नौकरी आज।
नेता सबको छल रहे,सब धन का संजोग।।
आज *खिलौना* बन गया,आम आदमी जान।
शिक्षा के नव राह पर,मिटा नही यह रोग ।।
पढ़े लिखे जो लोग है,लोकतंत्र से त्रस्त।
रोजगार मिलता नही,नेता करते ढोंग।।
रचनाकार-आशा आजाद
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