गीत
बनी आज अंगूरी पानी,आज नाश का मूल,
कोरोना के रोग काल मे,शासन करता भूल।
बीमारी के बुरे दौर में,जन जन जूझे आज,
मदिरालय का द्वार खोलकर,दें कैसा आगाज,
खाने को है अन्न नही अब,व्यर्थ बढ़े है शूल,
बनी आज अंगूरी पानी,आज नाश का मूलृ
मदिरापान बुरी बला है, करे देह नुकसान,
जनता फिरभी जहर पी रहे,जान सभी अंजान,
झोला धरकर मदिरालय में,सहे धूप का शूल,
बनी आज अंगूरी पानी,आज नाश का मूल।
दरिद्रता फैली है फिरभी,ले नहिं संज्ञान,
असुरक्षित हुआ भविष्य सुनो,रखे कौन अब भान,
मिलकर कविगण सभी चलायें,नेक निरंतर तूल,
बनी आज अंगूरी पानी,आज नाश का मूल।
आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़
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