Sunday, 31 May 2020

रोला छंद-नारी

           रोला छंद
नारी है अवतार

नारी है अवतार,हृदय में इसे बसाएँ।
जगती का आधार,प्रेम के पुष्प चढ़ाएँ।
जीवन का उद्धार,जन्म देकर करती है।
मुश्किल कितनी राह,कर्म से ये बढ़ती है।

कभी बहन बन जाय,प्रेम से घर को रखती।
दुख की होवें छाँव,धर्म के पथ पर चलती।
देती हरपल साथ,हाल कैसा भी होवें।
मात पिता का भार,प्रेम से मिलकर ढोवें।

बेटी फर्ज निभाय,काज में हाथ बँटाती,
सबका रखती ध्यान,प्रेम से धर्म निभाती,
मात पिता का ध्यान,करे दे सेवा भारी।
दुख सुख सह परिवार,निभाये वो है नारी।।

पत्नी बनकर धर्म, निभाती है ये मानो।
पालन पोषण रोज,कर्म करती पहचानो।
सँभालती परिवार,श्रेय सब जाता इनको।
देवी का वरदान,दुखाना कभी न मन को।

घर की होती नींव,यही है श्रेष्ठ सहारा,
नारी जीवन सार,एक है यही अधारा।
रिश्तें रखती थाम,प्यार ममता बरसाती।
एकसूत्र में बाँथ,प्रेम का पाठ पढ़ाती।।

रचनाकार-आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़

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