Tuesday, 5 May 2020

गीत

गीत

सृजन भाव आधार बनाएँ,
            भावों का हम गुनगान करें।
काव्य कुंज में कवि मन कुहके,
             सम्मोहित हो रसपान करें।

सृजन सदा नव आलोकित हो,
               नेकी का सुंदर भाव पले।
ज्ञान आदर्श हृदय समाये,
          कर्म बनाकर जन साथ चले।
दीन हीन का उद्धार करें,
           मनुज धर्म का आह्वान करें।
काव्य कुंज में कवि मन कुहके,
             सम्मोहित हो रसपान करें।

सृजन आत्म मंथन जब होगा,
            अंधकार फिर मिटेंगे सभी।
ज्योत प्रेरणा की जागेगी,
             द्वेष पनप न पाएगा कभी।
मिथ्या सूचक संदेश न हो
              सुंदर नव मंगल गान करें।
काव्य कुंज में कवि मन कुहके,
             सम्मोहित हो रसपान करें।

मृदुवाणी और मधुरता से,
           कलम सदैव ही सुगंधित हो।
निर्मलता हो और गहनता,
        सृजन करें वह भी साधित हो।
ज्ञान संचार हो लेखन में,
        जनहित का सब उत्थान करें।
काव्य कुंज में कवि मन कुहके,
           सम्मोहित हो रसपान करें।

रचनाकार-आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़

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