सरसी गीत
माता रानी अब तो आओ,करती तेरा जाप,
कलयुग में माँ बुरा कृत्य है,नित्य बढ़े है पाप।
नन्हीं बाला तड़प रही है,सुनलें उसकी चींख,
लाज बचादे चुप क्यों बैठी,माँगे तुझसे भींख,
नित्य वासना मानुष मन में,तन का ये अभिताप,
माता रानी अब तो आओ,करती तेरा जाप।
पथ पर सुनले जब भी जाये,घेरें उसको लोग,
तार तार अस्मत को करते,समझे केवल भोग,
ये कैसा कलयुग है माता,करें न पश्चाताप,
माता रानी अब तो आओ,करती तेरा जाप।
भाई भाई में खून खराबा,जायदाद का लोभ,
अति चाहत की बढ़े लालसा,कभी न करते क्षोभ
नित्य घटे है आज देखले,रिश्तों का परिमाप,
माता रानी अब तो आओ,करती तेरा जाप।
मानवता का पाठ पढ़ाने,ले माँ तू अवतार,
हृदय भाव में समता भरदे,संभव तब उद्धार,
नारी प्रताप अंतस मन में,करें सभी आलाप,
माता रानी अब तो आओ,करती तेरा जाप।
रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
पता- मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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