Friday, 3 April 2020

अमृतध्वनि छंद

            आशा की अमृत वाणी

अमृतध्वनि छंद

राष्ट्रवाद का ध्यान धर,करना होगा कर्म।
जनहित की ये राह है,समझे अपना धर्म।
समझे अपना,धर्म देश हित,फर्ज निभाये।
भाईचारा,समता रखना,ये सिखलाये।
आशा वाणी,ये कहती है,सुन आर्तनाद।
हृदय भाव में,सदा विराजे,शुभ राष्ट्रवाद।

मदिरा पीना छोड़ दे,पीता क्यों दिन रैन।
जहरीला ये पान है,छीनें सबका चैन।।
छीनें सबका-चैन मान अरु,सबकुछ खोता।
घरवाली से,झगड़ा करके,फिर है रोता।।
आशा कहती है,बहे पसीना।
कर्म घर्म को,मान त्याग दे,मदिरा पीना।।

निश्छल ममता माँ करे, ये जीवन आधार ।
निर्मल मन से बाँटती, हृदय भाव से प्यार ।
हृदय भाव से- प्यार बाँटकर, धर्म निभाती ।
दुख सुख सहकर, कष्ट उठाकर, फर्ज सिखाती ।
आशा कहती , नेेेक कर्म अरु, रखती समता ।
जगत सार है, हृदय भाव में, निश्छल ममता ।।

जल की कीमत जान लें,रखलें सदा सहेज।
नित्य तड़पते जल बिना,पुण्य कमाये भेज।।
पुण्य कमाये,भेज उन्हें जो,दीन दुखी है।
बड़े दूर से,पानी लाते,नही सुखी है।।
आशा वाणी,ये कहती है,जल दें हर पल।
व्यर्थ न होवें,कभी किसी के,हाथों से जल।।

सुंदर मीठे बोल हो,करें नेक व्यवहार।
छोटी सी है जिंदगी,बाँटे सबको प्यार।।
बाँटे सबको,प्यार हृदय से,निश्छल मन हो।
कर्म करे सब,प्रेम भाव से,पुलकित जन हो।।
आशा वाणी,ये कहती है,अपने अंदर।
आप बनाये,श्रेष्ठ छवि तन,मन को सुंदर।।

नेक सृजन का सार हो,जग का हो उद्धार।
सुंदर नव पथ मार्ग पर,चले कलम की धार।।
चले कलम की-धार करे जो,नव उजियारा।
सुंदर कविता,गढ़ दें ऐसा,लागे न्यारा।।
*आशा* वाणी,ये कहती है,खुश हो जन मन।
कलम उठाकर,कवि सब रचदें,नव नेक सृजन।।

कोरोना का रोग ये,लेता सबकी जान।
रोग बड़ा संक्रमित है,रखलो यह सब ज्ञान।।
रखलो सब यह,ज्ञान घरों से,नही निकलना,
घर के भीतर,रहें सुरक्षित, बात समझना।।
आशा वाणी,ये कहती है,धीर न खोना।
नित्य चहुँओर,फैल रहा है,ये कोरोना।।

रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


No comments:

Post a Comment