गीत
विधान छंद -- शंकर छंद 26 मात्रा
16,10 । पदांत -- 21
*असमंजस के बीच भँवर में,*
.*है घिरा इंसान।*
*कलुषित करता मानवता को,*
*बन रहा हैवान।*
*लोभ मोह की लालच रखकर,*
*भूलता सब कर्म।*
*बना रहा वर्चस्व झूठ पर,*
*त्यागता सब धर्म।*
*भाई का दुश्मन भाई है,*
*व्यर्थ करता सान।*
*असमंजस के बीच भँवर में,*
*है घिरा इंसान।*
*सत्य पथ का त्याग है करते*
*कपट छल से वार।*
*दीन दुखी की दुखित व्यथा पर,*
*घात बारंबार।*
*वर्तमान कलुषित करता है,*
*झूठ पर अभिमान।*
*असमंजस के बीच भँवर में,*
*है घिरा इंसान।*
*अस्मिता कहाँ है नारी की,*
*है आज ये प्रश्न।*
*लुटती बाला न्याय माँगती,*
*पाप करता जश्न।*
*कलयुग में नारी की रक्षा,*
*कुछ रखे संज्ञान।*
*असमंजस के बीच भँवर में,*
*है घिरा इंसान।*
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
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