गीत
विधान छंद -- शंकर छंद 26 मात्रा
16,10 । पदांत -- 21
*असमंजस के बीच भँवर में,*
.*है घिरा इंसान।*
*कलुषित करता मानवता को,*
*बन रहा हैवान।*
*लोभ मोह की लालच रखकर,*
*भूलता सब कर्म।*
*बना रहा वर्चस्व झूठ पर,*
*त्यागता सब धर्म।*
*भाई का दुश्मन भाई है,*
*व्यर्थ करता सान।*
*असमंजस के बीच भँवर में,*
*है घिरा इंसान।*
*सत्य पथ का त्याग है करते*
*कपट छल से वार।*
*दीन दुखी की दुखित व्यथा पर,*
*घात बारंबार।*
*वर्तमान कलुषित करता है,*
*झूठ पर अभिमान।*
*असमंजस के बीच भँवर में,*
*है घिरा इंसान।*
*अस्मिता कहाँ है नारी की,*
*है आज ये प्रश्न।*
*लुटती बाला न्याय माँगती,*
*पाप करता जश्न।*
*कलयुग में नारी की रक्षा,*
*कुछ रखे संज्ञान।*
*असमंजस के बीच भँवर में,*
*है घिरा इंसान।*
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
Friday, 8 November 2019
मनहरण घनाक्षरी-नारी
विषय -चित्राधारित लेखन
मनहरण घनाक्षरी
*नारी की पीड़ा न जाने,मान को न पहचाने,*
*अनाचार खूब करें,कैसा अपमान है।*
*माँ की कद्र भूले सभी,बहन न माना कभी,*
*मर्यादा समझे नही,पापी इंसान है।*
*कहाँ जाये आज नारी,घेरे उसे अत्याचारी,*
*तड़प तड़प देती,अपनी वो जान है।*
*अस्मत कैसै बचायें, विश्वास कहाँ पायें,*
*मानुष होते पाप को,देख अनजान है।*
*कुंठित मानसिकता,लूटते नित्य अस्मिता,*
*मानवता कलंकित ,होता अत्याचार है।*
*नारी की ये दुख व्यथा,सुधारे सारी व्यवस्था,*
*नारी पढ़ लिख के भी,कितनी लाचार है।*
*घिनौने कृत्य क्यों करें,हृदय सम्मान भरें,*
*मान ही तो नारी का ये,श्रेष्ठ उपहार है।*
*कलुषित मत करो,मानवता नित्य धरो,*
*माँ बेटी बहन होती,रिश्ता ये स्वीकार ले।*
आशा आजाद...✍️
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