Sunday, 5 August 2018

आशा की कविता ....तिरंगा

तिरंगा का सबसे बड़ा है जनतंत्र,
तिरंगा में वीरता का गूँजता यहाँ मंत्र,
तिरंगा है माँ भारती का अभिमान,
तिरंगा के नीचे मानव जीता स्वतंत्र।

तिरंगा में शहीदों की कुरबानी बसी है,
तिरंगा में वीरों की जवानी बसी है;
तिरंगा का जिसने बढ़ाया है मान,
तिरंगा में स्वतंत्रता की कहानी बसी है।

तिरंगा में बलिदानो का मान बसा है,
तिरंगा में कुरबानी का खून बसा है;
तिरंगा के लिए जिसने दे दी अपनी जान,
तिरंगा में अपनो का सम्मान बसा है।

तिरंगा में मस्जिद गुरुद्वारे बसे है,
तिरंगा में चर्च और मंदिर बसे है;
तिरंगा में संस्कृति का सुंदर है आधार ,
तिरंगा में मधुर गीतो के भाव बसे है।

तिरंगा में बसा है सुंदर कश्मीर,
तिरंगा में बहता है गंगा का नीर;
तिरंगा के लिए सीना जिसने दिया चीर,
तिरंगा की शान शहीद है वो वीर।

तिरंगा में बसा है हमारा ये सम्मान,
तिरंगा में बसता है भारत का जान;
तिरंगा की शान ना कभी कम करना,
तिरंगा में जीना मरना अपनी है शान।

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