मध्यभारत का फेफड़ा हसदेव" जो एक विश्वस्तरीय विशाल काव्यमयी साझा संकलन है, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य ही नहीं वरन् देश-विदेश से भी साहित्यकारों ने इस विषय विशेष पर अपनी रचनाओं के माध्यम से "मध्यभारत का फेफड़ा- हसदेव" में अपनी रचनाओं के माध्यम से इस काव्य संकलन को अलंकृत किया है। इस किताब को इस उद्देश्य से लिखा गया है कि छत्तीसगढ़ हसदेव अरण्य जो आज खतरे में है, उसके संरक्षण और संवर्धन को लेकर लिखी गई है। इस किताब में साहित्यकारों ने काव्य एवं आलेख के माध्यम से अपनी-अपनी भावाभिव्यक्ति की है, जिसमें पर्यावरण का संदेश निहित है।
इस विश्वस्तरीय किताब में 101 साहित्यकार सम्मिलित है, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न जिलों से 91, भारत के विभिन्न राज्यों से 08, आस्ट्रेलिया से 01, कैलिफोर्निया से 01 साहित्यकारों ने अपना काव्य सृजन कर विश्व कीर्तिमान में अपना विशेष योगदान दिया है। यह विशाल काव्यमयी साझा संकलन भारत की उपलब्धि पर भिन्न-भिन्न अभिव्यक्तियों पर आधारित है, जिसमें कुल 300 पृष्ठ है।
इस ग्रंथ के संपादक के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य में जन्मीं डॉ. आशा आजाद "कृति" है एवं समन्वयक के रूप में श्री मंगल उरांव (उपमहाप्रबंधक, भटगाव क्षेत्र) एवं मुख्य सलाहकार के रूप में डॉ. उदयभान सिंह चौहान जी के सहयोग से तैयार किया है। यह काव्य साझा संकलन भारत देश को समर्पित है, जिसमें साहित्यकारों ने अपनी अमूल्य भूमिका निभाई है और संदेशप्रद भावनाओं की अभिव्यक्ति की है। छत्तीसगढ़ राज्य के लिए ही नहीं वरन् पूरे विश्व के लिए यह किताब प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में लाभकारी सिद्ध होगी।
_इस ग्रंथ को “गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में स्थान प्राप्त हो चुका है।”_
*Title : “Madhyabhaarat ka Phephada - Hasadev”*
*First poetry book on tree and forest protection*
*शीर्षक: मध्यभारत का फेफड़ा हसदेव*
*पेड़ और वन संरक्षण पर पहली कविता पुस्तक*
संपादक -डॉ.आशा आजाद"कृति", प्रदेश संयोजिका, वर्ल्ड रिकार्ड होल्डर
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