Saturday, 12 December 2020

सरसी छंद-शारद माता

सरसी छंद गीत


करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।

नेक सृजन का पथ हो माता , भरदो नव विश्वास ।


जनहित का उद्धार करे हम , सृजन गढ़े अनमोल ।

शब्द शब्द में सार समाये , मन जाए नित डोल ।

हृदय भाव की अभिव्यक्ति से , फैले नित्य उजास ।

करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।


लेखन में भाईचारा हो , प्रेम भाव का सार ।

लेखन से समता उद्गम हो , कर्म बने आधार ।

सत भावना उद्गम होकर , करे नवीन विकास ।

करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।


कटुता मन की हरले लेखन , झूठ सभी मिट जाय ।

सुंदर अभिव्यक्ति से जनहित , सुरभित मन मुस्काय ।

सृजन पढ़े जब मानव सुंदर , छाए नित उल्लास ।

करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।


आशा आजाद" कृति"

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