सरसी छंद गीत
करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।
नेक सृजन का पथ हो माता , भरदो नव विश्वास ।
जनहित का उद्धार करे हम , सृजन गढ़े अनमोल ।
शब्द शब्द में सार समाये , मन जाए नित डोल ।
हृदय भाव की अभिव्यक्ति से , फैले नित्य उजास ।
करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।
लेखन में भाईचारा हो , प्रेम भाव का सार ।
लेखन से समता उद्गम हो , कर्म बने आधार ।
सत भावना उद्गम होकर , करे नवीन विकास ।
करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।
कटुता मन की हरले लेखन , झूठ सभी मिट जाय ।
सुंदर अभिव्यक्ति से जनहित , सुरभित मन मुस्काय ।
सृजन पढ़े जब मानव सुंदर , छाए नित उल्लास ।
करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।
आशा आजाद" कृति"
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