गीत
पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे,
मैं तो भीगी पिया जी के रंग,खूब खेलूँ होली रे।।
मैं कुछ इतराऊँ कुछ बलखाऊँ,नैन जब टकराये जी,
आएँ मुख पर जब गुलाल मलने,मन बहुत शर्माये जी,
लगता जैसै सारी ये खुशियाँ,आज भरती झोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने,मन बिछा रंगोली रे।
इस होली की है बात निराली,मन आज सुंदर लागे है,
जहाँ भागते है पिय मस्ती में,मन मधुर ये भागे है,
हृदय भाव पुलकित मुस्काता,मन प्रेम की रोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे।
साजन मुझको आज रंग दो जी,प्रेम अगाड़ गहरा हो,
तेरे नाम के सभी रंग गुलाल हो,मन रंग का पहरा हो,
नित्य घेरकर चिढ़ा रही सखियाँ,छेड़ते है हमजोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे।
रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़