Wednesday, 23 December 2020

गीत

 गीत

पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे,
मैं तो भीगी पिया जी के रंग,खूब खेलूँ होली रे।।

मैं कुछ इतराऊँ कुछ बलखाऊँ,नैन जब टकराये जी,
आएँ मुख पर जब गुलाल मलने,मन बहुत शर्माये जी,
लगता जैसै सारी ये खुशियाँ,आज भरती झोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने,मन बिछा रंगोली रे।

इस होली की है बात निराली,मन आज सुंदर लागे है,
जहाँ भागते है पिय मस्ती में,मन मधुर ये भागे है,
हृदय भाव पुलकित मुस्काता,मन प्रेम की रोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे।

साजन मुझको आज रंग दो जी,प्रेम अगाड़ गहरा हो,
तेरे नाम के सभी रंग गुलाल हो,मन रंग का पहरा हो,
नित्य घेरकर चिढ़ा रही सखियाँ,छेड़ते है हमजोली रे,
पुलकित है मेरे नैन सलोने, मन बिछा रंगोली रे।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Saturday, 12 December 2020

सरसी छंद-शारद माता

सरसी छंद गीत


करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।

नेक सृजन का पथ हो माता , भरदो नव विश्वास ।


जनहित का उद्धार करे हम , सृजन गढ़े अनमोल ।

शब्द शब्द में सार समाये , मन जाए नित डोल ।

हृदय भाव की अभिव्यक्ति से , फैले नित्य उजास ।

करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।


लेखन में भाईचारा हो , प्रेम भाव का सार ।

लेखन से समता उद्गम हो , कर्म बने आधार ।

सत भावना उद्गम होकर , करे नवीन विकास ।

करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।


कटुता मन की हरले लेखन , झूठ सभी मिट जाय ।

सुंदर अभिव्यक्ति से जनहित , सुरभित मन मुस्काय ।

सृजन पढ़े जब मानव सुंदर , छाए नित उल्लास ।

करूँ वंदना शारद माँ की , करती हूँ यह आस ।।


आशा आजाद" कृति"