गीत
पार लगादो नैया मेरी,मेरे मन के राम।
नितदिन मैं जपती हूँ मन से,प्रभु तेरा ही नाम।।
सीता माता हृदय विराजे,सुंदर छवि मन भाय।
माता कौशल्या के बेटा,जन्म सफल कहलाय।
सबके मन में नित्य विराजें,प्रभु ही चारो धाम।
नितदिन मैं जपती हूँ मन से,प्रभु तेरा ही नाम।।
करुणा की मूर्ति कहे है,देखो सकल समाज।
भाग्य बनाने वाले देवा,जग के है सरताज।
पुण्य काज की राह चले सब,नेक कर्म आगाज।
नितदिन मैं जपती हूँ मन से,प्रभु तेरा ही नाम।।
निर्मल मन की भावना रहे,रखें कभी नहिं द्वेष।
सत्य कर्म की राह चले जो,मानव वही विशेष।
सत्य धर्म संदेश राम का,शत् शत् तुझे प्रणाम।
नितदिन मैं जपती हूँ मन से,प्रभु तेरा ही नाम।।
रचनाकार -आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
No comments:
Post a Comment