Wednesday, 15 April 2020

सरसी छंद गीत

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

वंसुधरा पर सुंदर जीवन,है अपना आधार।
भूले से भी कभी न बिगड़े,धरती का श्रृंगार।।

छिपा हुआ भूगर्भ सहत पर,भूजल का भंडार।
शुद्ध रुप में बहे निरंतर,इससे ही संसार।
व्यर्थ कभी मत सुनो गँवाना,सुनो नीर उपहार।
वंसुधरा पर सुंदर जीवन,है अपना आधार।।

खनिज संपदा बहुत धरा पर,वंसुधरा की शान।
मानव जीवन पर लोहा का,बहुत बड़ा है स्थान।
जितना हो जरुरत बस निकले,कहे धरा यह सार।
वंसुधरा पर सुंदर जीवन,है अपना आधार।

आज कोयला गर्भ धरा से,खूब निकाले खान।
धरा नष्ट हो रही निरंतर,होय भूस्खलन जान।
रिक्त जगह को भरते जाएँ,तब होगा उद्धार।
वंसुधरा पर सुंदर जीवन,है अपना आधार।।

वृक्ष न काटे खूब लगाये,समझें इसका मोल।
मानसून है इसपर निर्भर,मानव आँखें खोल।
पौधारोपण करें सभी जन,स्वस्थ देह का द्वार।
वंसुधरा पर सुंदर जीवन,है अपना आधार।।

वन्य जीव व्याकुल है कितने,कितने वे बेचैन।
कटते जंगल लोभ मोह में,छिनता उनका रैन।
यहाँ वहाँ भटकने ना दे,होवें न निराधार।
वंसुधरा पर सुंदर जीवन,है अपना आधार।।

गीतकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

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